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‘माँ तुझे सलाम’ ऐसे संगीतबद्ध हुआ AR रहमान ने कहा: पैगंबर ने कहा था कि देशभक्ति इस्लाम का आधा हिस्सा है 🇮🇳

Entertainment  •  👁 10 views  •  27 Jan 2026
‘माँ तुझे सलाम’ ऐसे संगीतबद्ध हुआ AR रहमान ने कहा: पैगंबर  ने कहा था कि देशभक्ति इस्लाम का आधा हिस्सा है 🇮🇳
भारतीय संगीत जगत के महान संगीतकार ए.आर. रहमान ने अपने सुप्रसिद्ध गीत “माँ तुझे सलाम” के बारे में एक पुराना लेकिन प्रेरणादायक कारण साझा किया है जो आज फिर चर्चा में है। यह गीत 1997 में भारत की 50वीं स्वतंत्रता वर्षगाँठ के अवसर पर रहमान द्वारा रचा और गाया गया था और तब से यह गीत भारत के सबसे लोकप्रिय देशभक्ति गीतों में शुमार है।
रहमान ने बताया कि इस गीत को बनाने के पीछे सिर्फ राष्ट्रीय भावना नहीं थी, बल्कि उन्हें इस्लाम के एक धार्मिक विचार से प्रेरणा मिली थी। उनका कहना था कि इस्लाम में भी कहा गया है कि अपने देश के प्रति देशभक्ति रखना “इस्लाम का आधा हिस्सा” है — यानी एक सच्चा व्यक्ति अपने देश के प्रति सम्मान और प्रेम रखे। यही विचारधारा उन्हें गीत लिखने के लिए प्रेरित करने वाली थी।
उन्होंने यह भी कहा कि गीत का उद्देश्य सिर्फ़ भारत के लिए गर्व की भावना जगाना नहीं था, बल्कि इसे हर समुदाय और धर्म के लोगों के लिए एक भावनात्मक सेतु बनाना था ताकि युवा वर्ग भी बिना किसी पक्षपात के इससे जुड़ सके। लिरिसिस्ट मेहबूब कोटवाल द्वारा लिखे बोलों के साथ यह गीत एक सुंदर अभिव्यक्ति बन गया जो भारत के प्रति सम्मान दिखाता है।
हाल के दिनों में रहमान का यह उद्देश्य फिर से सुर्खियों में आया है क्योंकि उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि कुछ दिनों से उन्हें फिल्म उद्योग में कम काम मिल रहा है और यह “साम्प्रदायिक कारणों” से भी हो सकता है। इस पर प्रतिक्रिया में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके इरादे हमेशा सकारात्मक रहे हैं और वे संगीत के ज़रिये देश और संस्कृति का सम्मान करना चाहते हैं।
“माँ तुझे सलाम” गीत ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी लोगों को भावविह्वल किया है और आज भी स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य राष्ट्रीय समारोहों में यह गीत भारतीयों के दिलों को जोड़ता है।
यह कहानी बताती है कि कैसे एक गीत सिर्फ संगीत नहीं बल्कि एक गहरा संदेश भी देता है — देशभक्ति, एकता और सांस्कृतिक सम्मान — और यही कारण है कि “माँ तुझे सलाम” आज भी भारतीयों के दिलों में जीवित है।