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एक के बाद एक मोर्चे पर भिड़ंत: रेवन्थ रेड्डी सरकार ने तेलंगाना में BRS को किस तरह पीछे धकेला 🇮🇳

Politics  •  👁 12 views  •  27 Jan 2026
एक के बाद एक मोर्चे पर भिड़ंत: रेवन्थ रेड्डी सरकार ने तेलंगाना में BRS को किस तरह पीछे धकेला 🇮🇳
तेलंगाना में मुख्यमंत्री A. रेवन्थ रेड्डी की कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही **पूर्व शासन में रहे प्रमुख क्षेत्रीय दल भरत राष्ट्र समिति (BRS) को लगातार अलग‑अलग मोर्चों पर घेर रखा है, जिससे BRS राजनीतिक रूप से कमजोर स्थिति में है।
सबसे बड़ा तरीका यह रहा है कि सरकार ने कम से कम चार अलग‑अलग मामलों में BRS नेताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों को जांच व कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा दिया है, जिससे पार्टी को अपने राजनीतिक अभियानों और संगठन विस्तार पर ध्यान देने का मौका नहीं मिल रहा है। इससे BRS को लगातार सुरक्षा‑विहीन और डिफेंस‑स्थिति में बने रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
इन अभियानों में BRS के उपाध्यक्ष एवं कार्यकारी अध्यक्ष K. T. रामा राव (KTR) को भी शामिल जांचों में नामजद किया गया है, जैसे फ़ोन टैपिंग जांच और अन्य आरोपों के तहत SIT (Special Investigation Team) द्वारा पूछताछें। BRS ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” और जनादेश को कमजोर करने की रणनीति बताया है, और राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह सदन में आलोचना करने के लिए विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है।
इन कानूनी मामलों के अलावा, रेवन्थ रेड्डी सरकार ने भूमि लेन‑देन की विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट जैसी पहलें भी शुरू की हैं, जिनमें पूर्व BRS सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए धोखाधड़ी‑संदिग्ध कामों की समीक्षा शामिल है — इससे पार्टी के पुराने कार्यकाल पर सवाल उठ रहे हैं और विवाद कायम हुए हैं।
राजनीतिक रूप से भी रेवन्थ रेड्डी सरकार BRS के विरुद्ध सक्रिय रही है — उन्होंने न केवल विपक्ष के प्रतीक चिन्हों और प्रचार को कट्टर आलोचना का निशाना बनाया है, बल्कि पार्टी के चुनावी और ग्राम‑स्तर के संगठन नेटवर्क को कमजोर करने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई है। इसके चलते BRS को चुनावी और सामाजिक मुद्दों पर जनमानस का समर्थन जुटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार इस स्थिति का मुख्य कारण यह है कि कांग्रेस सरकार BRS को लगातार “प्रतिशोधात्मक जांच और कानूनी प्रक्रियाओं से उलझा कर” रखने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे BRS अपनी राजनीतिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित नहीं कर पा रही। ऐसे कदमों ने BRS के नेतृत्व को हमेशा डिफेंस‑मोड में रखकर उसे प्रमुख राजनीतिक पहलें करने से रोक दिया है।