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चीन के शीर्ष जनरल झांग यूक्सिया पर ‘न्यूक्लियर योजना’ लीक करने के आरोप, जांच शुरू

International  •  👁 16 views  •  27 Jan 2026
चीन के शीर्ष जनरल झांग यूक्सिया पर ‘न्यूक्लियर योजना’ लीक करने के आरोप, जांच शुरू
चीन की सत्तारुढ़ Communist Party of China (सीसीपी) और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सबसे वरिष्ठ जनरल, झांग यूक्सिया (Zhang Youxia) के खिलाफ एक गंभीर जांच शुरू की गई है, जिसमें उन पर अमेरिका को चीन के “न्यूक्लियर हथियार कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील तकनीकी डेटा” लीक करने का आरोप लगाया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार यह आरोप The Wall Street Journal द्वारा प्रकाशित एक गोपनीय ब्रीफिंग के आधार पर सामने आए हैं, जिसमें उच्च-स्तरीय अधिकारियों को इस संदिग्ध कृत्य के बारे में जानकारी दी गई थी।
झांग यूक्सिया 75 वर्ष के हैं और वे चीन की सर्वोच्च सैन्य कमान Central Military Commission (CMC) के वाइस-चेयरमैन तथा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के करीबी सहयोगी माने जाते रहे हैं। आरोपों में यह भी शामिल है कि उन्होंने सेना के भीतर बड़े अधिकारियों की पदोन्नति के लिए रिश्वत ली और सत्ता संरचना में गुटबंदी बनाई।
चीन की सरकार ने जांच की घोषणा करते समय इसे “गंभीर अनुशासन और कानून उल्लंघन” बताया है, लेकिन आधिकारिक बयान में न्यूक्लियर डेटा लीक का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे स्थिति पर कुछ अस्पष्टता बनी हुई है। आलोचकों का मानना है कि यह कदम शी जिनपिंग की सेना में चल रही व्यापक भ्रष्टाचार-रोधी मुहिम और सैन्य नेतृत्व में समर्पण तथा निष्ठा सुनिश्चित करने के प्रयास का हिस्सा है।
विश्लेषकों के अनुसार, झांग जैसे वरिष्ठ और विश्वसनीय अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए इतने गंभीर आरोप चीन के सैन्य आदेश, नेतृत्व स्थिरता और भीतर-ही-भीतर बढ़ रही राजनैतिक अनिश्चितता को उजागर करते हैं। इससे न केवल PLA की कमान शक्ति पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि पड़ोसी देशों और वैश्विक सुरक्षा पर्यवेक्षकों के बीच भी चिंता बढ़ रही है।
हाल के वर्षों में चीन ने अपनी सैन्य और राजनीतिक संरचना में कई बड़े बदलाव देखे हैं, जिसमें कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हटाए जा चुके हैं। झांग के मामले की गंभीरता यह दर्शाती है कि चीनी नेतृत्व अब अपने भीतर किसी भी संभावित चुनौती या “आत्मिक खतरों” को रोकने के लिए कठिन कदम उठा रहा है।
इस घटना को चीन-अमेरिका के बीच बढ़ती जासूसी-और-सुरक्षा तनाव की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सैन्य रणनीति पर पड़ सकता है।