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RSS नेता दत्तात्रेय होसबले ने संविधान की तारीफ की, ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों पर सवाल उठाने के महीनों बाद

Politics  •  👁 12 views  •  26 Jan 2026
RSS नेता दत्तात्रेय होसबले ने संविधान की तारीफ की, ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों पर सवाल उठाने के महीनों बाद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबले ने हाल ही में एक प्रमुख कार्यक्रम में भारतीय संविधान की तारीफ की। यह घटना उन महीनों के बाद हुई है, जब उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों पर सवाल उठाए थे। उनके इस बयान को राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर व्यापक चर्चा का विषय बना दिया गया है।
होसबल ने कहा कि संविधान देश की सर्वोच्च कानून व्यवस्था है और यह भारतीय लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने संविधान को एक ‘जीवित दस्तावेज़’ बताया जो समय के साथ समाज और देश की जरूरतों के अनुसार विकसित हुआ है। हालांकि, उन्होंने पिछले साल प्रस्तावना के कुछ शब्दों पर अपनी आपत्ति जताई थी, जिसे लेकर कई विशेषज्ञ और विपक्षी दलों ने भी बहस की थी।
उन्होंने अपने हालिया बयान में यह भी जोड़ा कि संविधान का मूल उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार, न्याय और स्वतंत्रता देना है। होसबले ने यह स्पष्ट किया कि संविधान की सराहना करते हुए किसी भी शब्द या धारा पर चर्चा करना लोकतंत्र का हिस्सा है। उनके इस बयान को विशेषज्ञों ने एक संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा है, जो आलोचना और सम्मान दोनों को साथ लेकर चलता है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम संघ और उसके नेताओं द्वारा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है। वहीं, कुछ आलोचक इसे आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी मान रहे हैं।
इस बयान से यह संदेश गया कि भारतीय संविधान न केवल आलोचना के लिए खुला है, बल्कि इसकी अहमियत और प्रासंगिकता को स्वीकार करना भी जरूरी है। दत्तात्रेय होसबले का यह दृष्टिकोण संघ और नागरिक समाज के बीच संविधान की भूमिका पर नई बहस को जन्म दे सकता है।