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‘जो देश के काम न आए…’: रंग दे बसंती आज भी अपने दर्शकों से यही सवाल करती है

Entertainment  •  👁 15 views  •  26 Jan 2026
‘जो देश के काम न आए…’: रंग दे बसंती आज भी अपने दर्शकों से यही सवाल करती है
साल 2006 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘रंग दे बसंती’ आज भी भारतीय दर्शकों के बीच अपनी सशक्त सामाजिक और देशभक्ति संदेश के लिए याद की जाती है। फिल्म ने युवा पीढ़ी को यह सोचने पर मजबूर किया कि “जो देश के काम न आए, वह बेकार है”। 20 साल गुजरने के बावजूद, यह संवाद और फिल्म का मूल संदेश समाज और राजनीति में विचार करने लायक बना हुआ है।
निर्देशक राजकुमार हिरानी और अभिनेता अमिताभ बच्चन, आमिर खान, सिद्धार्थ, श्रेयस तलपड़े और अन्य कलाकारों की जीवंत भूमिका ने फिल्म को कालजयी बना दिया। फिल्म में दिखाए गए युवा संघर्ष और सामाजिक जिम्मेदारी के विचार आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिल्म की प्रासंगिकता का कारण यह है कि यह केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभक्ति, भ्रष्टाचार विरोध और सामाजिक जागरूकता को सामने लाती है। इस फिल्म ने दर्शकों को यह सवाल पूछने पर मजबूर किया कि वे अपने देश के लिए कितना योगदान दे रहे हैं।
सिनेमा प्रेमियों और आलोचकों का मानना है कि ‘रंग दे बसंती’ ने भारतीय सिनेमा में सामाजिक संदेश और युवा आंदोलन को नया आयाम दिया। फिल्म का संगीत, संवाद और पात्र आज भी युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
20 साल बाद भी, यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि देशभक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि कर्म और योगदान में झलकती है। ‘रंग दे बसंती’ का यह संदेश हर युग में प्रासंगिक रहेगा और नए दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगा।