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AI अब इंटिमेसी में कदम रख रहा है, लेकिन अकेलेपन का संकट नहीं मिटा सकता

Technology  •  👁 14 views  •  26 Jan 2026
AI अब इंटिमेसी में कदम रख रहा है, लेकिन अकेलेपन का संकट नहीं मिटा सकता
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कामकाजी उपकरण या स्मार्ट असिस्टेंट तक सीमित नहीं रह गया है। टेक्नोलॉजी कंपनियां अब AI आधारित चैटबॉट और वर्चुअल पार्टनर विकसित कर रही हैं, जो उपयोगकर्ताओं के भावनात्मक जुड़ाव और इंटिमेसी की ज़रूरतों को पूरा करने का दावा करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जबकि AI व्यक्ति को सुन सकता है, उसके साथ संवाद कर सकता है और व्यक्तिगत सलाह भी दे सकता है, लेकिन यह अकेलेपन या भावनात्मक कमियों का स्थायी समाधान नहीं है। मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि वास्तविक मानव संपर्क, सहानुभूति और भावनात्मक गहराई केवल इंसान के बीच मौजूद होती है।
एक अध्ययन के अनुसार, AI के साथ संवाद करने वाले लोग अल्पकालिक राहत महसूस कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय में सामाजिक अलगाव की भावनाएं बढ़ सकती हैं। AI आधारित इंटिमेसी टूल्स, चाहे वह रोमांटिक चैटबॉट हों या डिजिटल साथी, केवल तकनीकी सहारा हैं, मानव संबंधों की जगह नहीं ले सकते।
सामाजिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि AI पर ज्यादा निर्भरता, खासकर भावनात्मक जुड़ाव के लिए, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इसके बजाय, AI का इस्तेमाल अकेलेपन के समाधान के लिए सहायक उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए, न कि अंतिम समाधान के रूप में।
टेक्नोलॉजी और मानव इंटिमेसी के इस नए युग में, संतुलन बनाना जरूरी है। AI हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना सकता है, लेकिन सच्चा जुड़ाव और भावनात्मक समर्थन केवल इंसानी संबंधों से ही आता है।