The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

“केरल के पावरब्रोकर: चुनाव में जाति‑धर्म का प्रभाव — वो संगठन जिनसे पार्टियां नज़रें नहीं हटा सकतीं”

Politics  •  👁 9 views  •  26 Jan 2026
 “केरल के पावरब्रोकर: चुनाव में जाति‑धर्म का प्रभाव — वो संगठन जिनसे पार्टियां नज़रें नहीं हटा सकतीं”
केरल की राजनीति पर चुनाव से पहले जाति और धार्मिक संगठनों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिनकी अनदेखी किसी भी मुख्य पार्टी नहीं कर सकती। राज्य की आगामी विधानसभा चुनावी तैयारियों के बीच ऐसी कई ताकतें उभर रही हैं जो सामाजिक पहचान के आधार पर मतदाताओं के इरादों को आकार दे सकती हैं।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जाति‑आधारित समूह जैसे नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) और श्री नारायण धर्मपरिपालना (SNDP) योगम केरल के प्रभावशाली पावरब्रोकर्स में शामिल हैं। इन संगठनों के नेता न केवल समुदाय के हितों की आवाज उठाते हैं, बल्कि उनमें से कई ने प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ गठजोड़ या समर्थन का संकेत भी दिया है, जिससे सियासी समीकरण बदल सकते हैं।
इसी प्रकार मुस्लिम समुदाय के भीतर संगठन जैसे जमात‑ए‑इस्लामी हिंद और सामस्थ केरल जेम‑इय्याथुल उलमा (AP शिया/सुननी संगठन) भी राज्य की राजनीति में अपनी सक्रियता दर्ज करा रहे हैं। इन समूहों द्वारा समाजिक और धार्मिक मुद्दों पर दी जा रही दिशा‑निर्देश पार्टियों को ध्यान में रखना जरूरी है, खासकर उन इलाकों में जहां मुस्लिम आबादियों की संख्या अधिक है।
क्रिश्चियन समुदाय के भीतर क्रिश्चियन एसोसिएशन एंड अलायंस फॉर सोशल एक्शन (CAASA) जैसे संगठनों की भूमिका भी चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर रही है। इन समूहों के रुझान पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि राज्य में ईसाई मतदाता भी निर्णायक साबित होते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार इन पावरब्रोकर्स के वास्तविक वोट‑निर्णय पर प्रभाव की सीमा स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए यह स्पष्ट है कि वे इन संगठनों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। खासकर ऐसे समय में जब केरल में जाति‑धर्म आधारित मतदाताओं के रुझान चुनावी मोर्चे को पलट सकते हैं।
इस विश्लेषण से यह संदेश मिलता है कि जाति‑धार्मिक पहचान के आधार पर गठबंधन और समर्थन चुनाव नतीजों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, और राजनीतिक दलों की रणनीतियों का केंद्र बने रहेंगे।