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पश्चिमी एशिया की ताकतें क्यों नहीं चाहतीं कि ट्रंप ईरान पर हमला करें? क्षेत्रीय संतुलन और अस्थिरता की बड़ी वजहें

International  •  👁 7 views  •  26 Jan 2026
पश्चिमी एशिया की ताकतें क्यों नहीं चाहतीं कि ट्रंप ईरान पर हमला करें? क्षेत्रीय संतुलन और अस्थिरता की बड़ी वजहें
पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) की कई बड़ी ताकतें यह नहीं चाहतीं कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या कोई भी अमेरिकी प्रशासन ईरान पर सीधा सैन्य हमला करे या वहां की सरकार को गिराने की कोशिश करे। इसके पीछे क्षेत्रीय राजनीति, सुरक्षा संतुलन और आर्थिक हितों से जुड़ी कई अहम वजहें हैं।
सबसे पहली और बड़ी वजह है क्षेत्रीय अस्थिरता का डर। ईरान पश्चिमी एशिया की एक प्रमुख सैन्य और राजनीतिक शक्ति है। अगर ईरानी सरकार गिरती है, तो इससे इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे पहले से अस्थिर देशों में हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे पूरे क्षेत्र में गृहयुद्ध और सत्ता संघर्ष फैलने की आशंका है।
दूसरी अहम वजह है तेल और ऊर्जा सुरक्षा। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति करता है। युद्ध की स्थिति में तेल सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं। सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देश आर्थिक झटकों से बचना चाहते हैं।
तीसरी वजह है प्रॉक्सी वॉर का खतरा। ईरान के क्षेत्र में कई सहयोगी और समर्थक गुट सक्रिय हैं, जैसे हिज़्बुल्लाह। हमला होने पर ये गुट अमेरिकी और उसके सहयोगियों के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं, जिससे संघर्ष सीमित न रहकर क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
इसके अलावा, कई पश्चिम एशियाई देश मानते हैं कि सरकार गिराने से लोकतंत्र नहीं आता, जैसा कि इराक और लीबिया के उदाहरणों में देखा गया। वहां सत्ता परिवर्तन के बाद लंबे समय तक अराजकता बनी रही।
इसी कारण पश्चिमी एशिया की बड़ी ताकतें ईरान के साथ टकराव की बजाय कूटनीति और संतुलन को प्राथमिकता देना चाहती हैं। उनके लिए शांति, स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा किसी भी सैन्य जीत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।