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डेनमार्क ने ग्रीनलैंड पर कैसे कंट्रोल किया: एक संक्षिप्त इतिहास

International  •  👁 18 views  •  24 Jan 2026
डेनमार्क ने ग्रीनलैंड पर कैसे कंट्रोल किया: एक संक्षिप्त इतिहास
ग्रीनलैंड, आज दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप, मूल रूप से इनुइट (Inuit) लोगों का घर रहा है। यूरोपीय इतिहास में यह सबसे पहले 10वीं सदी में एरिक द रेड जैसे नोर्स (Norse) समुद्री खोजियों द्वारा बसाया गया, लेकिन बाद में ये मध्यकाल में समाप्त हो गया। कई शताब्दियों के बाद 1721 में डेनमार्क‑नॉरवे के मिशनरी हंस एगेड़े ने ग्रीनलैंड में अपना धर्म प्रचार और व्यापार स्थापित किया, जिससे डेनमार्क की भूमिका और प्रभाव की शुरुआत हुई। यह वास्तव में डेनमार्क की ग्रीनलैंड में निरंतर उपस्थिति का पहला चरण था।
18वीं शताब्दी में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड के व्यापार पर एकाधिकार कर लिया और विदेशी जहाजों को कोस्टल क्षेत्रों में प्रवेश से रोक दिया, जिससे नियंत्रण मजबूत हुआ। 1774 में रॉयल ग्रीनलैंड ट्रेडिंग डिपार्टमेंट की स्थापना हुई, जो लंबे समय तक प्रशासन और व्यापार को संभालता रहा।
1940 के दशक में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब जर्मनी ने डेनमार्क पर कब्ज़ा कर लिया, तो ग्रीनलैंड अमेरिकी संरक्षण में आ गया, लेकिन 1945 में यह वापस डेनिश शासन में लौटा। 1953 में इसे औपचारिक रूप से डेनमार्क के आयुक्त (county) का दर्जा मिला।
1979 में ग्रीनलैंड ने होम रूल (आत्मशासन) के लिए जनमत संग्रह किया, जिसमें लगभग 70% वोटरों ने अधिक स्वशासन का समर्थन किया। इसके बाद से ग्रीनलैंड को शिक्षा, स्वास्थ्य और संसाधनों जैसी आंतरिक नीतियों में नियंत्रण मिला है, जबकि विदेशी नीति, रक्षा और मुद्रा संबंधी अधिकार अभी भी डेनमार्क के पास हैं।
आधुनिक समय में डेनमार्क‑ग्रीनलैंड संबंध कुछ जटिल भी रहे हैं — डेनमार्क ने इतिहास में ग्रीनलैंडियों पर कई नीतियाँ लागू कीं (जैसे नसबंदी कार्यक्रम) जो विवाद का विषय बनीं और जिनके लिए माफी दी गई है।
आज भी ग्रीनलैंड आंशिक स्वायत्त है और डेनमार्क का हिस्सा है, लेकिन पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करने की संभावना भी भविष्य में बनी है, जिसे डेनमार्क संसद की सहमति से ही संभव किया जा सकता है।