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‘वह बस अपने दम पर बड़ा हुआ’: मधु चोपड़ा इमोशनल हुईं, माना कि उनका बेटा बेटी प्रियंका की सफलता का ‘कोलैटरल डैमेज’ बन गया; साइकोलॉजिस्ट ने भी अपनी राय दी

Entertainment  •  👁 4 views  •  24 Jan 2026
‘वह बस अपने दम पर बड़ा हुआ’: मधु चोपड़ा इमोशनल हुईं, माना कि उनका बेटा बेटी प्रियंका की सफलता का ‘कोलैटरल डैमेज’ बन गया; साइकोलॉजिस्ट ने भी अपनी राय दी
बॉलीवुड की सुपरस्ट्रार प्रियंका चोपड़ा की माँ मधु चोपड़ा हाल ही में एक इंटरव्यू में भावुक होते हुए स्वीकार करती दिखीं कि उनकी बेटी की जबरदस्त सफलता का उनके बेटे, सिद्धार्थ चोपड़ा पर गहरा प्रभाव पड़ा — इतना कि उन्होंने उसे “कोलैटरल डैमेज” (Collateral Damage) तक बताया है। इस बयान से न सिर्फ़ परिवार की निजी चुनौतियाँ सामने आई हैं, बल्कि बड़े सितारों के पीछे के भावनात्मक दबाव का भी एक पक्ष उजागर हुआ है।
मधु चोपड़ा ने बताया कि जब प्रियंका ने Miss World चुनने के बाद वैश्विक प्रसिद्धि हासिल की और बॉलीवुड‑हॉलीवुड में अपनी जगह बनाई, उस समय परिवार पूरी तरह से उसकी करियर यात्रा के साथ जुड़ा हुआ था। अपने बेटे सिद्धार्थ के बारे में उन्होंने कहा, “वह बस अपने दम पर बड़ा हुआ… क्योंकि पिता काम में व्यस्त थे और मैं प्रियंका के साथ थी।” इसका असर यह हुआ कि सिद्धार्थ को अपने शुरुआती और किशोरावस्था के वर्षों में काफी अकेलेपन और संघर्ष का सामना करना पड़ा, और परिवार की इस प्राथमिकता ने उसे भावनात्मक रूप से प्रभावित किया।
मधु ने यह भी स्वीकार किया कि वह रोज़ सिद्धार्थ को संघर्ष करते हुए देखती हैं, और यह सोचकर कभी‑कभी उन्हें दुख और पछतावा भी होता है। उन्होंने कहा कि परिवार को आज भी प्रत्येक दिन अपनी उपलब्धियों के लिए आभार व्यक्त करना चाहिए और बच्चों के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
कमेंटेटर्स और साइकोलॉजिस्ट भी इस विषय पर बताते हैं कि जब परिवार या माता‑पिता एक बच्चे के करियर या सफलता के पीछे अत्यधिक ध्यान केंद्रित कर देते हैं, तो इससे दूसरे बच्चे की भावनात्मक ज़रूरतें अनदेखी हो सकती हैं। यह सibling rivalry या emotional neglect जैसा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा कर सकता है, जिसमें दूसरा बच्चा अपनी पहचान और आत्म‑मूल्य को स्थापित करने में कठिनाइयाँ महसूस करता है। ऐसे मामलों में भावनात्मक समर्थन, संवाद और व्यक्तिगत ध्यान बेहद ज़रूरी हो जाता है।
यह खुलासा न केवल प्रियंका चोपड़ा जैसे ग्लोबल सितारे के पारिवारिक जीवन का एक संवेदनशील पक्ष दिखाता है, बल्कि यह परिवार, माता‑पिता और बच्चों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी रेखांकित करता है — खासकर जब सफलता और प्रसिद्धि एक सदस्य के जीवन में बड़े बदलाव लाती है।