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TikTok US में नए कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर की वजह से बचा हुआ है। क्या भारत भी यही रास्ता अपना सकता था?

International  •  👁 15 views  •  24 Jan 2026
TikTok US में नए कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर की वजह से बचा हुआ है। क्या भारत भी यही रास्ता अपना सकता था?
सोशल मीडिया एप TikTok ने अमेरिका में बैन के खतरे (national security concerns) से बचने के लिए एक नई कॉर्पोरेट संरचना अपनाई है, जिसके तहत उसकी यूएस ऑपरेशंस को अमेरिकी निवेशकों के नेतृत्व वाले संयुक्त उद्यम में बदल दिया गया है। इससे ऐप बड़ी संख्या में अमेरिकी उपयोगकर्ताओं के लिए जारी रह पाया है, जबकि चीन की ByteDance अब सिर्फ़ 19.9% हिस्सा रखती है और अधिकांश नियंत्रण अमेरिकी पक्ष के पास है। इसके परिणामस्वरूप TikTok को बैन से बचाने में सफलता मिली है।
इस नए ढांचे में Oracle, Silver Lake और MGX जैसे अमेरिकी और वैश्विक निवेशकों ने संयुक्त रूप से TikTok के यूएस संचालन का अधिकांश हिस्सा (लगभग 80%) अपने नियंत्रण में लिया है। नए बनाये गए TikTok USDS Joint Venture LLC के बोर्ड में अधिकांश अमेरिकी सदस्य होंगे और डेटा सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन तथा यूज़र डेटा को अमेरिका में ही सुरक्षित रखने के उपाय किए गए हैं। इससे अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं को काफी हद तक संबोधित करने का प्रयास किया गया है।
यह कदम यह दर्शाता है कि राजनीतिक और नियामक दबाव के बीच भी एक कंपनी अपने संचालन को बचाने के लिए मालिकाना नियंत्रण और संचालन संरचना बदल सकती है। हालांकि यह सौदा विवादों और आलोचनाओं से भी मुक्त नहीं है — कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव कभी-कभी सुरक्षा चिंताओं के मूल मुद्दों पर पर्याप्त जवाब नहीं देता।
अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत भी TikTok की तरह एक वैकल्पिक मॉडल अपना सकता था जब उसने 2020 में सुरक्षा कारणों के चलते TikTok पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय भारत ने सीधे पूरे प्लेटफॉर्म को प्रतिबंधित कर दिया, बजाय इसके कि वह TikTok को अलग कॉर्पोरेट ढांचे के तहत काम करने की अनुमति दे। बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने अमेरिका की तरह डेटा लोकलाइजेशन, नियंत्रण और सुरक्षा गारंटी के साथ नया मॉडल अपनाया होता, तो भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए यह प्लेटफॉर्म उपलब्ध रह सकता था और स्थानीय तकनीकी विकल्‍पों को विकसित करने का समय भी मिलता।
दूसरी ओर, भारत ने स्थानीय स्तर पर इंडियन ऐप्स को बढ़ावा दिया, लेकिन वे वैश्विक स्तर पर TikTok जैसी पकड़ नहीं बना पाए। इस पर बहस चलती रही है कि क्या भारत ने टिकटॉक प्रतिबंध के विकल्प के रूप में कोई विकल्प ढांचा तैयार कर सकता था — जो ना केवल सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करे बल्कि नवाचार और उपयोगकर्ता अनुभव को भी ध्यान में रखता।
संक्षेप में, अमेरिका ने TikTok को कॉर्पोरेट रीस्टруктरिंग के जरिए बचा लिया है — एक रास्ता जो भारत ने नहीं अपनाया। यह दोनों देशों की नीति और सुरक्षा प्राथमिकताओं में अंतर को भी दर्शाता है।