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विक्टोरिया बेकहम वह सीख रही हैं जो भारतीय लंबे समय से जानते हैं: ‘रिश्तों के भी रूप बदलते हैं’

Entertainment  •  👁 4 views  •  24 Jan 2026
विक्टोरिया बेकहम वह सीख रही हैं जो भारतीय लंबे समय से जानते हैं: ‘रिश्तों के भी रूप बदलते हैं’
अंतरराष्ट्रीय फैशन आइकन और स्पाइस गर्ल्स की पूर्व सदस्य विक्टोरिया बेकहम ने अपने 26 साल लंबे वैवाहिक जीवन के अनुभवों के बारे में नई डॉक्यूमेंट्री में खुलकर बात की है, जिसमें उन्होंने यही महसूस किया कि समय के साथ रिश्ते बदलते और विकसित होते हैं — एक ऐसी सच्चाई जिसे भारतीय संस्कृति लंबे समय से जानती और अपनाती आ रही है।
विक्टोरिया ने अपने पति डेविड बेकहम के साथ अपने रिश्ते के बारे में कहा है कि जब वे दोनों बहुत युवा उम्र में मिले थे — वह 22 और वह 21 के थे — तो तब वे “बच्चे” थे। उन्होंने खुलासा किया कि स्मार्ट निर्णय, बड़ों की सलाह और वैवाहिक लक्ष्यों के बारे में बातचीत तब नहीं हुई थी, जो जीवन के बाद के वर्षों में आवश्यक होती है। इस रिश्ते में अलग-अलग समय पर दोनों के व्यक्तित्व, आकांक्षाएँ और प्राथमिकताएँ विकसित हुईं हैं, और यही विकास ही उनका सबसे बड़ा सबक है।
विक्टोरिया ने कहा, “अगर आप 26 साल साथ रहकर भी बदले नहीं हैं, तो यही एक समस्या है।” इसका मतलब यह है कि समय के साथ बदलाव और सीखना रिश्तों में मजबूती लाता है — न कि पुरानी आदतों या आशाओं पर अड़ जाना।
यह विचार भारतीय समाज में भी लंबे समय से स्वीकृत है। भारत की परंपरा में परिवार, रिश्तों और जीवन‑साथियों के बीच समय के साथ समझ और अनुकूलन को बहुत महत्व दिया जाता है। भारतीय संस्कार यह भी सिखाते हैं कि एक‑दूसरे की आदतों, विचारों और विकास को समझना और उसे अपनाना ही स्थिर रिश्तों की नींव है।
विशेषज्ञों की मानें तो रिश्ते का ईमानदार विकास सूचक यह है कि दोनों साथी जीवन की चुनौतियों, इच्छाओं और अलग‑अलग बदलावों के बीच एक साथ सीखते और बढ़ते हैं — न कि एक ही रूप में अटके रहते हैं। यही बात विक्टोरिया बेकहम ने भी अपने लंबे वैवाहिक सफ़र से सीखी और साझा की है।
यह अनुभव दिखाता है कि सेवाएँ बदल सकती हैं, समय बदल सकता है, परिस्थितियाँ बदल सकती हैं — लेकिन रिश्ता तभी टिकता है जब दोनों साथी बदलाव को समझने, अपनाने और उसमें साथ निभाने का प्रयास करते हैं। यही वह सीख है जिसे भारतीय संस्कृति सदियों से जानती और जीवन में अपनाती आई है।