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‘क्या अपने धर्म का पालन करना पाप है?’: हमले के बाद, ओडिशा के पादरी को अब किराए का घर खाली करने को कहा गया

Politics  •  👁 5 views  •  24 Jan 2026
‘क्या अपने धर्म का पालन करना पाप है?’: हमले के बाद, ओडिशा के पादरी को अब किराए का घर खाली करने को कहा गया
ओडिशा के धेंकानाल जिले में एक ईसाई पादरी पर भीड़ द्वारा हमले और अपमान के बाद अब उसके किराए के घर से निकलने का आदेश दिया गया है, जिससे इस घटना ने धार्मिक आज़ादी, संविधान और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पूरा मामला पादरी बिपिन बिहारी नायक से जुड़ा है, जिन पर जनवरी की शुरुआत में हमला हुआ था।
घटना के अनुसार, पादरी नायक पर 4 जनवरी 2026 को कंदरसिंगा गांव में लगभग 15–20 युवकों की भीड़ ने हमला किया था। उन्होंने उनके चेहरे पर सिंदूर लगाया, जूते की माला पहनाई और गांव में घुमाया — इसके बाद उन्हें बुरी तरह पीटा गया और कथित तौर पर विशेष धार्मिक प्रतीकों के सामने झुकने के लिए मजबूर किया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि यह हमला धार्मिक सक्ति और संप्रदाय के नाम पर किया गया था।
हमले के बाद नायक की पत्नी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के ढीलापन पर परिवार ने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत भी की। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और कुछ आरोपियों को नियंत्रण में लिया है।
लेकिन नाजुक स्थिति यहीं खत्म नहीं हुई। अपने आठ वर्ष तक पुराने किराये के घर में रहने के बावजूद, अब मकान मालिक ने पादरी और उनके परिवार को घर खाली करने को कहा है। उनके बड़ों में से एक ने पूछा है, “क्या अपने धर्म का पालन करना पाप है? क्या यह हमारे देश का मूलभूत अधिकार नहीं है?” — इस सवाल ने देशव्यापी चिंता को जन्म दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की रक्षा के अधिकार पर सीधा हमला है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 द्वारा सभी को अपनी आस्था का पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। ऐसे मामलों में सामाजिक सदभाव, कानूनी संरक्षण और न्यायिक त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
यह मामला न केवल व्यक्तिगत पीड़ा का प्रतीक है, बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक अधिकारों के लिए व्यापक बहस को भी उजागर करता है — जिसमें सरकार, प्रशासन और समाज दोनों से जवाबदेही की मांग हो रही है।