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US ने बांग्लादेश की फिर से उभर रही इस्लामी पार्टी को समर्थन का संकेत दिया, जिससे भारत के साथ बड़ी दरार का खतरा: रिपोर्ट

International  •  👁 6 views  •  24 Jan 2026
US ने बांग्लादेश की फिर से उभर रही इस्लामी पार्टी को समर्थन का संकेत दिया, जिससे भारत के साथ बड़ी दरार का खतरा: रिपोर्ट
अमेरिका ने बांग्लादेश में आगामी चुनावों से पहले जमात‑ए‑इस्लामी जैसी उभरती इस्लामी राजनीतिक पार्टी के साथ संवाद और रिश्तों को मजबूत करने के संकेत दिए हैं, जिससे भारत‑US और भारत‑बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संतुलन पर संभावित तनाव पैदा होने का जोखिम बढ़ गया है।
बांग्लादेश 12 फरवरी 2026 को अपने राष्ट्रीय चुनाव की ओर बढ़ रहा है, और चुनावी माहौल में जमात‑ए‑इस्लामी पार्टी का समर्थन बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राजनयिकों ने कुछ बैठकों में यह संकेत दिया है कि वे इस पार्टी के नेताओं के साथ संबंध बनाने को तैयार हैं और चाहते हैं कि पार्टी के प्रभावशाली सदस्यों को मीडिया और संवाद में शामिल किया जाए। यह कदम एक रणनीतिक परिवर्तन जैसा प्रतीत होता है जिसमें अमेरिका बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ तालमेल बैठाना चाहता है।
हालांकि अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वे किसी विशिष्ट पार्टी का समर्थन नहीं करते और यह बातचीत “रूटीन, ऑफ‑द‑रिकॉर्ड” थी, फिर भी यह संकेत अनदेखा नहीं किया जा सकता कि अमेरिका बांग्लादेश में उभरते इस्लामी समूहों को नजरअंदाज नहीं करना चाहता।
जमात‑ए‑इस्लामी की राजनीतिक पहचान इतिहास में विवादास्पद रही है। इस पार्टी को पहले प्रतिबंधित और फिर से उदित होते देखा गया है, और इसके समर्थकों में पाकिस्तान‑समर्थक रुख तथा 1971 की मुक्ति युद्ध के दौरान इसके विरोध की यादें शामिल हैं, जिनके कारण भारत लंबे समय से इस पार्टी को संदेह की दृष्टि से देखता रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका इस तरह के समूहों के साथ औपचारिक रिश्तों या सहयोग के संकेत देता है, तो यह भारत‑US रणनीतिक साझेदारी पर तनाव का कारण बन सकता है। खासकर तब जब बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा बदल रही है और भारत की पारंपरिक मित्र सरकार कमजोर हो चुकी है, ऐसे में इस्लामी समूहों का उठना नई सुरक्षा और राजनयिक चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति केवल चुनावी राजनीति का मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और नेपाल‑बांग्लादेश के साथ संतुलन जैसे मुद्दों से जुड़ी है। ऐसे में अमेरिका‑बांग्लादेश के रिश्तों में इस तरह के बदलावों का भारत के राजनीतिक और रणनीतिक हितों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।