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पंजाब की AAP सरकार को 10 लाख रुपये के हेल्थ कवर के रोल-आउट के बीच क्यों मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है

Politics  •  👁 13 views  •  24 Jan 2026
पंजाब की AAP सरकार को 10 लाख रुपये के हेल्थ कवर के रोल-आउट के बीच क्यों मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है
पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत हर परिवार को प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस और मुफ्त इलाज देने वाला हेल्थ कवर रोल‑आउट कर दिया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के लगभग 65 लाख परिवारों को गंभीर और महँगे इलाज से होने वाले आर्थिक बोझ से बचाना है। इसमें कार्ड धारकों को सरकारी व सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में 2,300 से अधिक इलाज और सर्जरी पैकेज का लाभ मिलेगा। यह पहल व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालाँकि, इस ऐतिहासिक घोषणा के बीच AAP सरकार को कई राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी दलों, खासकर भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने योजना की वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि ₹10 लाख तक का कवर पंजाब की मौजूदा आर्थिक स्थिति में “गणितीय रूप से असंभव” है और यह योजना केवल चुनावी लाभ के लिए प्रस्तुत की गई है। उन्हें कहना है कि राज्य की स्थिर बजटीय स्थिति और भारी कर्ज को देखते हुए इतनी बड़ी योजना को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना कठिन होगा।
SAD नेताओं ने यह भी दावा किया है कि असल में वास्तविक हेल्थ कवर ₹10 लाख नहीं, बल्कि मात्र ₹1 लाख का ही बीमा कवरेज है और सरकार शेष राशि को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के फंड से पूरा करने का वादा कर रही है, जो वास्तविकता से परे और मिस‑लीडिंग है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP यह योजना राजनीतिक डेटा इकट्ठा करने और युवा क्लबों को पदोन्नत करने के लिए उपयोग कर रही है, न कि वास्तविक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए।
वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियाँ, अस्पताल नेटवर्क के विस्तार, विशेषज्ञ कर्मचारियों की कमी और स्थिर वित्तीय मॉडल तैयार करना ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं जिन्हें सरकार को हल करना होगा ताकि योजना का रोल‑आउट सफल और दीर्घकालिक रूप से प्रभावी रहे। अगर ये चुनौतियाँ नहीं सुलझाईं गईं, तो योजना के क्रियान्वयन में देरी और नागरिकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे सरकार की प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ सकता है।