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स्टालिन ने ‘बाधा डालने वाले’ गवर्नर रवि की आलोचना की, तमिलनाडु विधानसभा के भाषण को राजभवन पर आरोप बना दिया

Politics  •  👁 15 views  •  24 Jan 2026
स्टालिन ने ‘बाधा डालने वाले’ गवर्नर रवि की आलोचना की, तमिलनाडु विधानसभा के भाषण को राजभवन पर आरोप बना दिया
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने राज्य विधानसभा में सत्तारूढ़ सरकार‑राजभवन रिश्तों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने **राज्यपाल आर. एन. रवि पर ‘बाधा डालने वाला’ तथा संवैधानिक प्रथाओं का अपमान करने वाला आरोप लगाया है। स्टालिन का यह हमला मुख्य रूप से उस विवाद के बाद आया है, जब राज्यपाल ने विधानसभा के प्रारंभिक सत्र में पारंपरिक उद्घाटन भाषण देने से इनकार कर दिया था, जिससे सरकार और राजभवन के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया।
यह विवाद इसलिए शुरू हुआ क्योंकि राज्यपाल आर. एन. रवि ने सरकार द्वारा तैयार किया गया संबोधन नहीं पढ़ा और सदन में राष्ट्रगान को शुरू में बजाने की अपनी मांग पर अड़े रहे। इससे पहले राष्ट्रीय गीत पर गत साल भी इसी तरह मत‑भेद पैदा हुए थे और रवि ने सत्र से वॉकआउट भी किया था, जिससे राजनीतिक गर्माहट बढ़ी।
स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि राज्यपाल का यह व्यवहार राज्य की निर्वाचित सरकार के प्रति अवमानना एवं संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में पहले ऐसे राज्यपाल नहीं रहे जिन्होंने सरकार के तैयार किए भाषण को छोड़ दिया हो। उन्होंने यह भी कहा, “हम किसी से देशभक्ति सिखाने की आवश्यकता नहीं रखते,” और तमिलनाडु की परंपरागत गौरवशाली भावना का हवाला दिया।
स्टालिन ने यह बात भी दोहराई कि पारंपरिक रूप से राज्य में तामिल थाई वाज़्थु सत्र की शुरुआत में और राष्ट्रगान अंत में बजाया जाता है, न कि इसके विपरीत जैसा राज्यपाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह विवाद सिर्फ़ एक मामूली घटना नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक प्रथाओं के साथ खिलवाड़ है।
इस राजनीतिक टकराव के बीच, स्टालिन सरकार अब संवैधानिक संशोधन पर विचार कर रही है ताकि राज्यसभा के पहले सत्र में राज्यपाल के संबोधन की अनिवार्यता को हटाया जा सके — यह कदम राज्यपाल‑सरकार के बीच बढ़ रहे तनाव को दर्शाता है और पार्टी के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा भी है।
यह विवाद विधानसभा में जोर‑शोर से जारी है और आगामी दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा स्थान रख सकता है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच।