The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

एक्सक्लूसिव | सरकारी टेबल पर: क्या वंदे मातरम का अपमान करने पर राष्ट्रगान की तरह सज़ा मिलनी चाहिए?

Politics  •  👁 9 views  •  24 Jan 2026
एक्सक्लूसिव | सरकारी टेबल पर: क्या वंदे मातरम का अपमान करने पर राष्ट्रगान की तरह सज़ा मिलनी चाहिए?
हाल ही में भारत में वंदे मातरम को लेकर एक नई बहस शुरू हुई है। सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वंदे मातरम के अपमान पर राष्ट्रगान की तरह क़ानूनी सज़ा दी जानी चाहिए। इस पर विशेषज्ञ, वकील और नागरिक अधिकार समूह अलग-अलग दृष्टिकोण पेश कर रहे हैं।
भारत का संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, लेकिन साथ ही संविधान में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान अनिवार्य करने के प्रावधान भी हैं। वर्तमान में राष्ट्रगान के अपमान पर भारतीय दंड संहिता की धारा 2 के तहत सज़ा निर्धारित है। विशेषज्ञों का कहना है कि वंदे मातरम भी देशभक्ति का प्रतीक है, लेकिन इसे राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा देना संवैधानिक और व्यवहारिक रूप से जटिल हो सकता है।
कानूनी विश्लेषकों के मुताबिक, वंदे मातरम पर सख्त कानून लागू करने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रश्न उठ सकते हैं। इसके अलावा, सज़ा की सख्ती और कानून की व्याख्या में संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, कुछ राजनीतिक और सामाजिक समूह मानते हैं कि राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं होना चाहिए और इसके लिए स्पष्ट दंड नियम आवश्यक हैं।
इस बहस में यह भी उभर कर आया है कि शिक्षा और सामाजिक जागरूकता ही लोगों में वंदे मातरम के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। कानून केवल अंतिम विकल्प होना चाहिए, न कि डर या दंड का माध्यम।
वंदे मातरम के अपमान पर राष्ट्रगान जैसी सज़ा देने की मांग से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना अब और जरूरी हो गया है। आने वाले समय में सरकार और न्यायपालिका की नीतियां इस बहस का मार्गदर्शन करेंगी।