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जब तक ऑर्डर बुक बड़ी नहीं हो जाती और स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 100% नहीं हो जाता, तब तक SMRs की व्यवहार्यता पर सवाल बना रहेगा: डॉ. अनिल काकोडकर

Politics  •  👁 16 views  •  29 Dec 2025
जब तक ऑर्डर बुक बड़ी नहीं हो जाती और स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 100% नहीं हो जाता, तब तक SMRs की व्यवहार्यता पर सवाल बना रहेगा: डॉ. अनिल काकोडकर
हालांकि SMRs (स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर) लोकल ग्रिड एप्लीकेशन के लिए एक स्वाभाविक पसंद हैं, लेकिन छोटे रिएक्टरों का मतलब होगा ज़्यादा रिएक्टर यूनिट, जिससे बड़े हादसे का खतरा बढ़ जाएगा, जब तक कि उनकी सुरक्षा उसी हिसाब से ऊंचे लेवल की न हो। देश के टॉप न्यूक्लियर साइंटिस्ट अनिल काकोडकर के अनुसार, सभी SMRs इस क्राइटेरिया को पूरा नहीं करेंगे।
अब जब भारत इंपोर्टेड यूरेनियम (ईंधन के तौर पर) के साथ बड़े PHWR (प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर) बनाने में सक्षम है, तो देश के पास अपने PHWRs में HALEU (हाई ऐसे, लो एनरिच्ड यूरेनियम नामक एक फ्यूल वेरिएंट) के साथ थोरियम को रेडिएशन देकर उसे फिसाइल यूरेनियम में बदलने के लिए इस रिएक्टर क्षमता का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की संभावना है। इससे ज़रूरी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्षमता बनने का इंतज़ार किए बिना, थोरियम चरण (भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का तीसरा चरण) पहले शुरू किया जा सकता है।