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भारत के गायब होते पिक्चर पैलेस: सिनेमैटोग्राफर हेमंत चतुर्वेदी ने सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों की मौत पर जताई चिंता

Entertainment   •   👁 38 views   •   24 Jan 2026
भारत के गायब होते पिक्चर पैलेस: सिनेमैटोग्राफर हेमंत चतुर्वेदी ने सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों की मौत पर जताई चिंता
भारत में सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों का दौर धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, और इस बदलाव ने फिल्म उद्योग और दर्शकों दोनों के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफर हेमंत चतुर्वेदी ने हाल ही में इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि सिंगल-स्क्रीन थिएटर सिर्फ फिल्म दिखाने की जगह नहीं, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का हिस्सा थे।
चतुर्वेदी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और मल्टीप्लेक्स के बढ़ते प्रभाव ने पुराने पिक्चर पैलेस को दबाव में डाल दिया। सिंगल-स्क्रीन थिएटर में दर्शकों को एक अलग सिनेमा अनुभव मिलता था—विशेषकर छोटे शहरों और कस्बों में, जहां ये थिएटर लोगों के सांस्कृतिक मेलजोल का केंद्र होते थे। उन्होंने कहा कि इन थिएटरों की कमी से फिल्म उद्योग की सामुदायिक पहचान और लोककला पर असर पड़ रहा है।
सिनेमैटोग्राफर ने यह भी बताया कि कई पुराने थिएटर पुरानी तकनीक और सीमित सुविधाओं के बावजूद दर्शकों को आकर्षित करते थे। यहां की ऑडिटोरियम की संरचना, बड़े पर्दे और स्थानीय रंगत फिल्मों का असली मज़ा देती थी। मल्टीप्लेक्स में सुविधाएं आधुनिक हैं, लेकिन वे स्थानीय फिल्म संस्कृति और पारंपरिक सिनेमा अनुभव की जगह नहीं ले सकते।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन समय रहते सिंगल-स्क्रीन थिएटरों के संरक्षण और समर्थन के लिए कदम न उठाएं, तो ये पूरी तरह से इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे। इसके साथ ही फिल्म इंडस्ट्री में विविधता और छोटे निर्माताओं के लिए प्लेटफॉर्म भी घट जाएगा।
कुल मिलाकर, हेमंत चतुर्वेदी का बयान यह दर्शाता है कि भारत में सिंगल-स्क्रीन थिएटर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अहमियत अब भी बरकरार है, और इसे बचाने के लिए सामाजिक और प्रशासनिक प्रयासों की आवश्यकता है।