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न स्याही वाले दस्तखत, न सरकारी मुहर: कानून मंत्रालय ने अडानी को US SEC का समन देने से क्यों किया इंकार?

International   •   👁 24 views   •   24 Jan 2026
न स्याही वाले दस्तखत, न सरकारी मुहर: कानून मंत्रालय ने अडानी को US SEC का समन देने से क्यों किया इंकार?
भारत के कानून और न्याय मंत्रालय ने हाल ही में अडानी ग्रुप को अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (US SEC) द्वारा भेजे गए समन को पूरा करने से मना कर दिया। मंत्रालय के अनुसार, समन में प्रस्तुत दस्तावेज़ और प्रमाण पत्र न तो स्याही वाले दस्तखत से सत्यापित थे और न ही किसी सरकारी मुहर से प्रमाणित थे, जिससे इसे कानूनी रूप से मान्यता देना मुश्किल था।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी नियामक संस्था का समन विदेशी कंपनी या उसके अधिकारियों से जानकारी जुटाने के लिए भेजा जाता है, लेकिन इसे भारतीय कानून और प्रक्रिया के तहत ही मान्यता दी जा सकती है। कानून मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी समन को सीधे मान्यता देना कानूनी प्रक्रियाओं और संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन हो सकता है।
इस कदम से यह संकेत मिलता है कि भारत स्थानीय कानून और विदेशी नियामकों के अनुरोधों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहता है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष को दस्तावेज़ों की वैधता प्रमाणित कराई जाती है और भारतीय कानून के अनुरूप प्रक्रिया पूरी होती है, तो आवश्यक सहयोग किया जा सकता है।
अडानी ग्रुप की तरफ से यह कदम अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और शेयर बाजार पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से निवेशकों की निगाहें कंपनी की पारदर्शिता और नियामक अनुपालन पर टिकी रहेंगी।
कुल मिलाकर, कानून मंत्रालय का यह निर्णय कानूनी प्रक्रिया, राष्ट्रीय संप्रभुता और दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता पर जोर देता है। यह मामला यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय जांच और घरेलू कानून के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।