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India-AI इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले बड़ा सवाल: AI गवर्नेंस में आखिर किसकी सुनी जाएगी?

Technology  •  👁 8 views  •  22 Jan 2026
India-AI इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले बड़ा सवाल: AI गवर्नेंस में आखिर किसकी सुनी जाएगी?
India-AI इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले देश और दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बहस तेज़ हो गई है। सबसे अहम और मुश्किल सवाल यह है कि AI गवर्नेंस तय करते समय किसकी आवाज़ को प्राथमिकता मिलेगी—सरकार की, टेक कंपनियों की, विशेषज्ञों की या आम नागरिकों की?
AI अब केवल तकनीक नहीं रह गया है। यह नौकरियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय प्रणाली, डेटा गोपनीयता और लोकतंत्र तक को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में AI के नियम और नीतियां बनाना बेहद संवेदनशील विषय बन चुका है। सरकारें चाहती हैं कि नवाचार पर रोक न लगे, जबकि समाज चाहता है कि तकनीक न्यायसंगत, सुरक्षित और जवाबदेह हो।
AI अब केवल तकनीक नहीं रह गया है। यह नौकरियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय प्रणाली, डेटा गोपनीयता और लोकतंत्र तक को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में AI के नियम और नीतियां बनाना बेहद संवेदनशील विषय बन चुका है। सरकारें चाहती हैं कि नवाचार पर रोक न लगे, जबकि समाज चाहता है कि तकनीक न्यायसंगत, सुरक्षित और जवाबदेह हो।
एक तरफ बड़ी टेक कंपनियां हैं, जिनके पास AI का तकनीकी ज्ञान, संसाधन और डेटा है। वे अक्सर लचीले नियमों की मांग करती हैं ताकि इनोवेशन तेज़ी से हो सके। दूसरी ओर नागरिक समाज, शिक्षाविद और नीति विशेषज्ञ हैं, जो डेटा सुरक्षा, एल्गोरिदमिक पक्षपात और जवाबदेही जैसे मुद्दों को सामने लाते हैं। सवाल यह है कि क्या आम लोगों की चिंताएं नीति निर्माण में उतनी ही गंभीरता से सुनी जाएंगी?
भारत जैसे देश में यह मुद्दा और भी अहम हो जाता है, क्योंकि यहां AI का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं, डिजिटल पहचान, बैंकिंग और निगरानी प्रणालियों में बढ़ रहा है। अगर गवर्नेंस केवल तकनीकी या कॉर्पोरेट नजरिए से तय हुई, तो इसका असर सीधे करोड़ों नागरिकों के अधिकारों पर पड़ सकता है।
India-AI इम्पैक्ट समिट 2026 को एक ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहां सरकार, उद्योग, स्टार्टअप्स, शिक्षाविद और सिविल सोसाइटी एक साथ बैठकर AI के भविष्य पर चर्चा करेंगे। असली परीक्षा यही होगी कि क्या यह संवाद केवल औपचारिक रहेगा या फिर नीतियों में विविध आवाज़ों को वास्तविक जगह मिलेगी।
निष्कर्ष:
AI गवर्नेंस का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि फैसले कुछ ताकतवर संस्थाओं तक सीमित रहते हैं या समाज के हर वर्ग की भागीदारी से बनते हैं। India-AI इम्पैक्ट समिट 2026 से उम्मीद है कि यह संतुलन बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।