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क्या बीजेपी को अब अजीत पवार की एनसीपी की ज़रूरत है? महाराष्ट्र में कुछ नेताओं के सोचने की वजह

Politics  •  👁 14 views  •  22 Jan 2026
क्या बीजेपी को अब अजीत पवार की एनसीपी की ज़रूरत है? महाराष्ट्र में कुछ नेताओं के सोचने की वजह
महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (NCP) के बीच रिश्तों को लेकर एक बड़ी राजनीतिक चर्चा उभरी हुई है। लंबे समय से महायुति (बीजेपी-शिंदे शिवसेना-एनसीपी) में शामिल NCP का बीजेपी के लिए उपयोगिता अब कई नेताओं के लिए सवाल बन चुकी है।
सबसे बड़ी वजह है कि बीजेपी के लिए गठबंधन में एनसीपी का वोट बैंक और प्रभाव उतना निर्णायक नहीं रहा जितना पहले माना जाता था। हाल के नगर निकाय चुनावों में बीजेपी ने NCP और महायुति के बाकी घटकों के साथ होने के बावजूद अपने दम पर भी अच्छी सफलता हासिल की, जिससे पार्टी के नेताओं को यह चिंता होने लगी कि NCP से गठबंधन के बिना भी वे मजबूत स्थिति में हैं। BJP ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे क्षेत्रों में जीत दर्ज की, जहाँ NCP के साथ भी चुनाव गठबंधन था लेकिन भाजपा के प्रदर्शन पर किसी तरह की कमी नहीं देखी गई।
बीजेपी के कुछ नेता यह भी महसूस कर रहे हैं कि अजित पवार की नेतृत्व वाली NCP का BJP के मूल वैचारिक आधार से मेल नहीं बैठता, और इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों के बीच असंतोष बढ़ा है। कई BJP कर्मियों का मानना है कि “एनसीपी के साथ जुड़े रहने से बीजेपी की पहचान और वोट बैंक को नुकसान हो सकता है” क्योंकि NCP का आधार अलग सामाजिक समूहों में फैला है जो हर चुनाव में निर्णायक नहीं होता।
इतना ही नहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि NCP का गठबंधन BJP को शिंदे शिवसेना जैसी स्थानीय साझेदारी देता है, लेकिन बीजेपी अब शिवसेना-शिंदे गुट के साथ ज्यादा भरोसेमंद गठबंधन देख रही है और NCP की भूमिका इसकी तुलना में कम महत्वपूर्ण होती जा रही है। इस स्थिति ने बीजेपी के भीतर यह बहस पैदा कर दी है कि क्या अब “NCP की आवश्यकता है या नहीं?”
इसके अलावा, कुछ राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले चुनावी मौसम में बीजेपी अपने दम पर भी चुनाव लड़ सकती है, खासकर तब जब पार्टी का संगठन मजबूत नजर आता है और गठबंधन आवश्यकताओं की कमी जैसी स्थिति बनती है।
👉 संक्षेप: अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बीजेपी को अजित पवार-NCP की ज़रूरत है? उसके कुछ नेताओं का मानना है कि बीजेपी अब अकेले चुनाव लड़ने या अन्य साझेदारों के साथ गठबंधन करने का विकल्प तलाश सकती है, क्योंकि NCP का सहारा अब उतना निर्णायक नहीं रह गया है।