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मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार के लिए शर्मिंदगी का कारण बनी मूर्ति के पीछे की कहानी

Politics  •  👁 18 views  •  22 Jan 2026
मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार के लिए शर्मिंदगी का कारण बनी मूर्ति के पीछे की कहानी
मध्य प्रदेश के खरगोन जिला में हाल ही में लगे तंत्या भील (Tantya Bhil) की प्रतिमा को लेकर विवाद सामने आया है, जिसने प्रदेश सरकार के लिए राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि प्रतिमा के निर्माण और स्थापना में भारी मनमानी, नियम-कानून की अनदेखी और सरकारी धन के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं, जिससे यह मामला सिर्फ एक प्रतीकात्मक मुद्दा नहीं रह गया बल्कि भ्रष्टाचार और संवेदनशील इतिहास के अपमान का आरोप बन गया।
तंत्या भील को भारत के इतिहास में “रोबिन हूड” जैसा नाम दिया जाता रहा है — उन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ कई वर्षों तक महत्त्वपूर्ण विद्रोह किया और आदिवासी समुदाय के सम्मान और न्याय के लिए संघर्ष किया। इन कारणों से उनकी भूमिका आदिवासी और इतिहास प्रेमी जनता के बीच विशेष रूप से सम्मानित है।
लेकिन खरगोन नगर निगम द्वारा लगाई गई प्रतिमा विवादग्रस्त बनी जब यह सामने आया कि आधिकारिक निविदा (tender) की तुलना में प्रतिमा की लागत और सामग्री में बड़ा फर्क है, जिसमें कहा जा रहा है कि निर्माण के लिए घोषित सामग्री (जैसे संगमरमर या धातु) के बजाय सस्ते फाइबर का इस्तेमाल हुआ। इससे यह संशय पैदा हुआ कि बड़े पैमाने पर जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है।
मामले के बाद कांग्रेस पार्टी ने खरगोन में प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन किया, और स्थानीय प्रशासन पर आदिवासी समुदाय की भावनाओं और सार्वजनिक निधियों के अपमान का आरोप लगाया। कांग्रेस के अनुसार, यदि इस विषय में उचित कार्रवाई नहीं होती है तो वे इसके खिलाफ और व्यापक आंदोलन करेंगे।
स्थानीय अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि आठ दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच पूरी की जाएगी, साथ ही उस प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस विवाद ने राजनीतिक रूप से आदिवासी समुदाय के बीच सरकार की छवि को प्रभावित किया है और इसे आगामी चुनावी मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।