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गुजरात के सीएम पटेल ने अधिकारियों से कहा, संरक्षित वन क्षेत्रों में आगंतुकों के लिए नीति बनाएं।

Politics  •  👁 8 views  •  22 Jan 2026
गुजरात के सीएम पटेल ने अधिकारियों से कहा, संरक्षित वन क्षेत्रों में आगंतुकों के लिए नीति बनाएं।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य के संरक्षित वन क्षेत्रों और अभयारण्यों में आगंतुकों (visitors) के लिए नीति (visitor policy) तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है, ताकि वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा के साथ–साथ पर्यटन एवं इको-टूरिज्म को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। यह निर्णय राज्य वाइल्डलाइफ बोर्ड की 26वीं बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें वन विभाग, विशेषज्ञ अधिकारी और विधायकों ने हिस्सा लिया।
सीएम पटेल ने कहा कि संरक्षित वन क्षेत्रों में आगंतुकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन अगर इसकी सही रूपरेखा और नीति नहीं होगी तो इससे वन्यजीवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने वन विभाग को स्पष्ट दिशानिर्देश (policy guidelines) तैयार करने के लिए कहा है ताकि पर्यटन के दौरान वन्यजीवों, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही इको-टूरिज्म को प्रोमोट करने पर भी बल दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिले।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बनासकांठा जिला के जेसोर स्लॉथ बियर सैनक्चुरी (Jessore Sloth Bear Sanctuary) को राष्ट्रीय भालू संरक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया है। साथ ही रतनमहल अभयारण्य में बाघ की उपस्थिति जैसे गंभीर विषयों पर विचार हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गुजरात में वन्यजीव विविधता संरक्षण गंभीरता से लिया जा रहा है।
सीएम ने ज़ोर देते हुए कहा कि नीति बनाते समय स्थानीय समुदायों की भागीदारी, वन कर्मियों की सुरक्षा, मार्गदर्शिका संकेत, यात्री आवागमन के नियम और सीख-प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समावेश जरूरी है। नीति में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि वनों में आगंतुकों की संख्या नियंत्रण में रहे, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और निवास स्थानों पर असर न पड़े।
इस बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि इन निर्देशों के आधार पर अगले कुछ महीनों में नीति तैयार कर लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, ताकि गुजरात के संरक्षित वन क्षेत्रों में सुरक्षित, संतुलित और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।