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I-PAC पर सवाल: रोहतक की जिस फर्म से 13.5 करोड़ का लोन लेने का दावा, वह कंपनी ही नहीं मिली

Politics  •  👁 12 views  •  22 Jan 2026
I-PAC पर सवाल: रोहतक की जिस फर्म से 13.5 करोड़ का लोन लेने का दावा, वह कंपनी ही नहीं मिली
प्रशांत किशोर से जुड़ी राजनीतिक रणनीति और परामर्श संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। I-PAC ने अपने आधिकारिक दस्तावेज़ों में दावा किया है कि उसे हरियाणा के रोहतक स्थित एक फर्म से 13.5 करोड़ रुपये का लोन मिला है, लेकिन जांच में सामने आया है कि जिस कंपनी से लोन लेने की बात कही जा रही है, उसका वास्तविक अस्तित्व ही संदिग्ध है।

सूत्रों के अनुसार, I-PAC द्वारा जिन वित्तीय विवरणों में इस लोन का उल्लेख किया गया है, उनमें कंपनी का नाम और पता दर्ज है। हालांकि जब बताए गए पते पर जाकर पड़ताल की गई तो वहां ऐसी किसी फर्म के मौजूद होने के प्रमाण नहीं मिले। न ही स्थानीय स्तर पर व्यापारिक रिकॉर्ड, जीएसटी पंजीकरण या अन्य आधिकारिक दस्तावेज़ों में उस कंपनी की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध है।

इस खुलासे के बाद I-PAC की फंडिंग प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक संगठन के लिए फंडिंग का स्रोत बेहद संवेदनशील मुद्दा होता है, खासकर तब जब संस्था विभिन्न राजनीतिक दलों और चुनावी अभियानों से जुड़ी रही हो।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर लोन देने वाली कंपनी वास्तव में मौजूद नहीं है, तो यह मामला फर्जी लेन-देन, शेल कंपनी या काले धन से जुड़ा हो सकता है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित नियामक संस्थाओं ने समय रहते इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया।

हालांकि, इस पूरे विवाद पर I-PAC की ओर से अभी तक कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। संगठन ने पहले यह जरूर कहा था कि उसके सभी वित्तीय लेन-देन नियमों के तहत हैं और आवश्यक दस्तावेज़ संबंधित प्राधिकरणों को सौंपे गए हैं।

फिलहाल, यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ I-PAC की साख को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि राजनीतिक फंडिंग की निगरानी व्यवस्था पर भी नए सवाल खड़े कर सकता है।