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मिट्टी के मैदान से चैंपियंस लीग तक: भारत में कबड्डी का सफर

Sports  •  👁 11 views  •  20 Jan 2026
मिट्टी के मैदान से चैंपियंस लीग तक: भारत में कबड्डी का सफर
कबड्डी, भारत का पारंपरिक खेल, वर्षों से ग्रामीण इलाकों के मैदानों में अपनी लोकप्रियता बनाए हुए है। यह खेल न केवल शारीरिक क्षमता और सहनशक्ति की परीक्षा लेता है, बल्कि रणनीति, टीमवर्क और मानसिक चतुराई की भी मांग करता है। भारत में कबड्डी का इतिहास सदियों पुराना है, लेकिन पिछले दशक में इसे एक नई पहचान और वैश्विक मंच पर स्थान मिला है।
पहले कबड्डी केवल मिट्टी के मैदानों और स्कूलों के खेल के रूप में खेली जाती थी। स्थानीय मेलों, वार्षिक प्रतियोगिताओं और ग्रामीण उत्सवों में इस खेल ने लोगों को जोड़ा। खिलाड़ियों की शारीरिक ताकत, धैर्य और टीम वर्क की विशेषताओं ने कबड्डी को गांव-देहात में अत्यधिक लोकप्रिय बनाया। खेल में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को अक्सर कठिन मेहनत और अनुशासन के माध्यम से तैयार किया जाता था।
आधुनिक युग में कबड्डी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से प्रगति की है। प्रो कबड्डी लीग (PKL) की शुरुआत ने इसे एक पेशेवर खेल में बदल दिया। अब खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानक के प्रशिक्षण, रणनीति और उपकरणों के माध्यम से तैयार किया जाता है। लीग ने न केवल खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि युवाओं में खेल के प्रति रुचि भी बढ़ाई।
आज भारत में कबड्डी सिर्फ खेल नहीं, बल्कि ग्लोबल मनोरंजन का हिस्सा बन गया है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और चैंपियंस लीग ने इसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है। खिलाड़ियों की मेहनत और अनुशासन ने इसे एक पेशेवर करियर का अवसर भी बना दिया है।
मिट्टी के मैदान से लेकर ग्लोबल स्टेडियम तक का यह सफर यह दिखाता है कि पारंपरिक खेल भी आधुनिक युग में अपनी जगह बना सकते हैं। कबड्डी ने यह साबित कर दिया कि अगर हुनर, मेहनत और उत्साह हो तो खेल के क्षेत्र में सीमाएं मायने नहीं रखती। आज कबड्डी न केवल भारत का गौरव है, बल्कि युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी