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अरावली विवाद गहराया: राजस्थान सरकार ने कम घनत्व गतिविधियों के लिए शहरी पहाड़ी क्षेत्रों को दी अनुमति

Politics  •  👁 5 views  •  29 Dec 2025
अरावली विवाद गहराया: राजस्थान सरकार ने कम घनत्व गतिविधियों के लिए शहरी पहाड़ी क्षेत्रों को दी अनुमति
राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला से जुड़ा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए फैसले के तहत ‘शहरी पहाड़ी क्षेत्रों’ में ‘कम घनत्व’ वाली गतिविधियों की अनुमति दिए जाने के बाद पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों में चिंता बढ़ गई है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अरावली क्षेत्र पहले से ही खनन, अतिक्रमण और शहरीकरण के दबाव से जूझ रहा है।
सरकार का तर्क है कि कम घनत्व वाली गतिविधियों—जैसे सीमित निर्माण, इको-टूरिज्म और आधारभूत सुविधाओं का विकास—से पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान होगा और शहरी विकास को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ‘कम घनत्व’ की परिभाषा स्पष्ट न होने से भविष्य में बड़े पैमाने पर निर्माण का रास्ता खुल सकता है।
अरावली पर्वत श्रृंखला उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाती है। यह न केवल भूजल संरक्षण में सहायक है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के कई हिस्सों में प्रदूषण को रोकने में भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में शहरी पहाड़ी क्षेत्रों को विकास के लिए खोलना दीर्घकालिक पर्यावरणीय नुकसान का कारण बन सकता है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की पूर्व गाइडलाइनों और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों के विपरीत है। उनका आरोप है कि यह नीति रियल एस्टेट और व्यावसायिक हितों को बढ़ावा दे सकती है, जिससे अरावली का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होगा।
वहीं, सरकार समर्थकों का दावा है कि उचित निगरानी और नियमों के तहत यह कदम रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। फिलहाल, अरावली विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर कानूनी व जन आंदोलन तेज होने की संभावना है।