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बीजेपी की बड़ी जीत के बाद विपक्ष के पूर्व मेयर और कई बार के कॉर्पोरेटर BMC में बदलावों का सामना कैसे करेंगे, इसकी क्या योजना है?

Politics  •  👁 11 views  •  18 Jan 2026
बीजेपी की बड़ी जीत के बाद विपक्ष के पूर्व मेयर और कई बार के कॉर्पोरेटर BMC में बदलावों का सामना कैसे करेंगे, इसकी क्या योजना है?
बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)‑शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन की बड़ी जीत के बाद न केवल सत्ता का समीकरण बदल गया है, बल्कि विपक्षी दलों के पूर्व मेयर और कई बार के कॉर्पोरेटर्स (नगरसेवक) अब नए राजनीतिक परिदृश्य का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने 227 सदस्यों वाली बीएमसी में बहुमत हासिल कर लिया है, जिसमें भाजपा अकेले 89 सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। इस बदलाव का बड़ा असर शिवसेना (उद्धव ठाकरे) सहित अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं पर पड़ेगा, जिन्होंने पिछले 25 वर्षों तक मुंबई के निगम पर शासन किया था।
विपक्षी शिवसेना (UBT) के कई पूर्व मेयर और अनुभवी कॉर्पोरेटर्स अब विपक्ष की बेंचों पर बैठेंगे। पिछले चुनाव में मुंबई के मेयर रहे किशोरी पेडनेकर सहित वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वे अब मजबूत विपक्ष का निर्माण करेंगे और निगम हाउस में सरकार के भ्रष्टाचार, नीतियों और नगर सुधारों पर सवाल उठाएंगे। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने पिछले दशकों में जो काम किए हैं, उनका संगठित तरीके से बचाव और समीक्षा विपक्षी भूमिका के तहत जारी रखेंगे।
बीजेपी‑शिंदे गठबंधन के बहुमत के बावजूद, विपक्षी नेता यह भी प्लान कर रहे हैं कि वे बीएमसी के संचालन, बजट नियुक्ति, और नीतिगत समीक्षा समितियों में सक्रिय भूमिका निभाएँ, ताकि शहर के स्थानीय हितों और पारंपरिक राजनीति को आवाज़ मिल सके। शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वे “बीएमसी घर में सकारात्मक निगरानी और जवाबदेही” का काम करेंगे, जिससे सरकार की योजनाओं पर जनता का ध्यान बना रहे।
साथ ही, कांग्रेस जैसे अन्य विपक्षी दलों के भीतर भी असंतोष उभर रहा है, उदाहरण के लिए मुंबई में हार के बाद कांग्रेस में नेतृत्व पर सवाल उठते देखे गए हैं, जिससे पार्टी के भीतर रणनीतिक पुनर्गठन की कार्रवाई की मांग बढ़ रही है।
इस बदलाव के बीच विपक्ष यह स्पष्ट करना चाहता है कि वह मतदाताओं के मुद्दों और पारंपरिक स्थानीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रहेगा, भले ही सत्ता अब बीजेपी‑शिंदे गठबंधन के हाथ में हो। विपक्षी नेताओं की योजना में सख्त निगरानी, नीति‑आलोचना, और जनता के फ़ीडबैक को स्थानीय निकाय के सामने लाने का लक्ष्य प्रमुख है, ताकि मुंबई की राजनीति में संतुलन और जवाबदेही बनी रहे।