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BMC का फैसला: 2022 में बंटवारे के बाद मुंबई में शिवसेना का बेस असल में किसके पास है?

Politics  •  👁 12 views  •  18 Jan 2026
BMC का फैसला: 2022 में बंटवारे के बाद मुंबई में शिवसेना का बेस असल में किसके पास है?
बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) के 2026 के चुनाव परिणाम ने स्पष्ट कर दिया है कि 2022 में हुई शिवसेना की टूट के बावजूद मुंबई में शिवसेना का प्रभाव पूरी तरह नहीं खत्म हुआ है, लेकिन अब उसका “बेस” दो अलग‑अलग धड़ों में बंट गया है। 2022 के राजनीतिक संकट के बाद शिवसेना दो हिस्सों में विभाजित हो गई थी: एक उद्धव ठाकरे नेतृत्व वाली शिवसेना (Shiv Sena UBT) और दूसरी एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना (Balasahebanchi Shiv Sena), जिसे चुनाव आयोग ने भी मान्यता दी थी।
बीएमसी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)‑शिंदे शिवसेना महायुति गठबंधन ने कुल 118 में से 114 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता में प्रवेश किया, जिससे मुंबई के ‘सबसे अमीर नगरपालिका’ पर 25 साल से चले आ रहे शिवसेना के एक पक्षीय कब्ज़े को बड़ा झटका मिला। भाजपा अकेले 89 सीटें जीत सकी, जबकि शिंदे शिवसेना को 29 सीटें मिलीं।
इन परिणामों से यह स्पष्ट हुआ है कि मुंबई का राजनीतिक आधार अब एक पक्षीय शिवसेना‑केंद्रित नहीं रहा, जैसा कि 1996 से 2022 तक था। 2017 में जहाँ संयुक्त शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं, वहीं 2026 में उद्धव ठाकरे‑नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने भी अब 65 सीटें हासिल कीं, जो यह दर्शाता है कि शिवसेना का परंपरागत वोट बैंक पहले जैसा विभाजित हो चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार मुंबई में शिवसेना का असली राजनीतिक आधार अब दो धड़ों में विभाजित है:
• UBL‑Shiv Sena (उद्धव गुट) का मजबूत आधार शहर के कुछ पारंपरिक मराठी‑मतदाता इलाकों, जैसे ग साउथ, वर्ली, दादर‑महिम क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहाँ उन्होंने कई सीटें जीतीं।
• शिंदे शिवसेना का आधार भाजपा के साथ मिलकर महायुति गठबंधन के हिस्से के रूप में अपेक्षाकृत कम लेकिन निर्णायक संख्या में दिखा, जो 29 सीटों पर जीतकर बीएमसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इसलिए वर्तमान में कहा जा सकता है कि मुंबई में शिवसेना का “बेस” केन्द्रित नहीं है बल्कि विभाजित है — उद्धव गुट का अपना एक मजबूत क्षेत्र है और शिंदे गुट भाजपा के सहयोग से महायुति में शामिल होकर सत्ता की राजनीति में सक्रिय है। दोनों गुट मिलकर अभी भी महायुति के 118 सीटें पार करने में योगदान दे रहे हैं, लेकिन शिवसेना का एक‑जुट, पुराना प्रभाव अब इतिहास बन चुका प्रतीत होता है।