The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार: सैनिकों को चाय पिलाने वाले बालक और विशेष जरूरतों वाले बच्चे की देखभाल करने वाले अनाथ बच्चे को मिला सम्मान

Politics  •  👁 24 views  •  27 Dec 2025
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार: सैनिकों को चाय पिलाने वाले बालक और विशेष जरूरतों वाले बच्चे की देखभाल करने वाले अनाथ बच्चे को मिला सम्मान
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देश के उन बच्चों को सम्मानित करने का प्रतिष्ठित मंच है, जिन्होंने कम उम्र में असाधारण साहस, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया है। हाल ही में घोषित पुरस्कारों में ऐसे प्रेरक उदाहरण सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इनमें सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को निस्वार्थ भाव से चाय पिलाने वाला एक बालक और विशेष जरूरतों वाले बच्चे की देखभाल करने वाला एक अनाथ बच्चा भी शामिल हैं।
सैनिकों को चाय पिलाने वाले बालक की कहानी देशभक्ति और सेवा-भाव का प्रतीक है। कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाने वाले जवानों के लिए वह रोज़ाना चाय लेकर पहुंचता है, ताकि उन्हें घर जैसी अपनापन भरी अनुभूति मिल सके। उसकी यह छोटी-सी पहल सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने का काम करती है और यह दर्शाती है कि सच्ची सेवा उम्र की मोहताज नहीं होती।
वहीं, एक अन्य पुरस्कार विजेता अनाथ बच्चा है, जो अपने सीमित संसाधनों के बावजूद विशेष जरूरतों वाले बच्चे की देखभाल करता है। खुद जीवन की कठिनाइयों से जूझते हुए उसने करुणा, जिम्मेदारी और मानवता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। उसकी यह भूमिका समाज के लिए प्रेरणा है कि संवेदनशीलता और सहानुभूति ही सच्ची ताकत है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार बच्चों को शिक्षा, खेल, कला, नवाचार, सामाजिक सेवा और बहादुरी जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। यह सम्मान न केवल बच्चों के प्रयासों को पहचान देता है, बल्कि अन्य बच्चों को भी सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करता है।
इन कहानियों से स्पष्ट है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। ऐसे बच्चे समाज में बदलाव की नींव रखते हैं और यह पुरस्कार उनकी मेहनत, साहस और सेवा-भाव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बनता है।