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शुक्रवार, 15 मई 2020

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आईजा पदाधिकारियों की ऑन लाईन बैठक सम्पन्न - अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर हुई चर्चा

अली असगर बोहरा
थांदला,15 May 2020
देश के सर्वाधिक चर्चित लोकप्रिय जैन पत्रकारों के संगठन आल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) की ज़ूम एप के जरिये ऑन लाईन बैठक हुई।
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जानकारी देते हुए आईजा के मध्यप्रदेश अध्यक्ष पवन नाहर ने बताया कि वैश्विक महामारी के दौरान आईजा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुण्डिया (मुंबई) की अध्यक्षता में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि अन्य राज्यों के पदाधिकारियों ने सहभागिता कर अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। जय जिनेन्द्र के अभिवादन के साथ बैठक के शुभारंभ में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि कोरोना महामारी में हमें अपने जिन शासन की प्रभावना कर रहे सच्चे साधकों के अनन्य उपकारों का स्मरण करते हुए उनकी सेवा सुश्रुषा का लाभ लेना है।
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उन्होंने कहा कि गुजरात के तथा कथित सन्त बन कर पाखण्ड फैलाने वाले सूर्यसागर जैन सन्त नही है व लोगों को भृमित कर जिन शासन की गरिमा धूमिल कर रहा है ऐसे सन्तों के खिलाफ सभी को एक जुट भी होना जरूरी है। उनकी बात पर सहमति जाहिर करते हुए राष्ट्रीय महासचिव महावीर जैन ने कहा कि दिगम्बर आईजा हमेशा से पाखण्ड के खिलाफ खड़ा हुआ है व दुराचारी सन्तों को बेनकाब कर जैन समाज के समक्ष एक आईना बनकर खड़ा हुआ है इसलिए जरूरी है कि हर जैन सन्तों के विपरीत आचरण पर आवाज उठाये व उन्हें आगम अनुसार मर्यादित रहकर स्व पर हितकारी बनना चाहिए अन्यथा संसारी वेश पहनकर सन्त का चोला छोड़ देना चाहिए। आईजा कि वरिष्ठ सदस्य दिलीप कवड़िया ने कहा कि यदि हम सच्चे सन्तों के लिये प्रचारक बन जाये तो बेहरुपीये सन्त अपने आप बेनकाब हो जाएंगे इसलिये हमें पोजीविटी फैलाने का प्रयास करना चाहिए इस पर आईजा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ऋतु जैन ने कहा कि ढोंगी सन्तों के ढोंग को सबके सामने लाना भी सकारात्मक पहल है क्योंकि संसार मे नेगेटिविटी जल्दी फैलती है इसलिए उसे खत्म करना भी जरूरी है। मध्यप्रदेश अध्यक्ष पवन नाहर ने कहा आजकल सन्तों का ट्रेंड बदल गया है वे सर्व धर्म प्रेरक बनकर जैन के साथ अन्य समाज के लोगों को भी ठगने का प्रयास कर रहे है। उन्होंने आपत्ति लेते हुए कहा कि कोई सन्त सर्व धर्म प्रेरक कैसे हो सकता है ..? इससे तो अच्छा है उसे सन्त का चोला ही छोड़ देना चाहिए। देश और व्यापार के सम्पादक ने कोरोना महामारी पर कोरोना योद्धाओं के लिये पत्रकारों की पैरवी करते हुए कहा कि आज पत्रकार ही है जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर समाज की समस्याओं को उजागर किया है व कोरोना संक्रमण के विस्तृत प्रचार कर जन जागृति भी फैलाई है बावजूद इसके शासन प्रशासन कि ओर से किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नही दी जा रही है। आईजा अपनी आवाज बुलंद कर शासन प्रशासन पुलिस व स्वास्थ्य कर्मियों की तरह पत्रकारों को भी कोरोना योद्धा मानते हुए उन्हें भी सुविधा प्रदान करवाये। इस अवसर पर शीतल जैन, अल्पेश भाई, प्रदीप पगारिया, नवीन संचेती, मनोज बोथरा, मान्य आदि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए संगठन के माध्यम से संगठन के सदस्य व सामाजिक सदस्यों से पूरे देश में विचरण कर रहे हर सम्प्रदाय के जिन शासन की प्रभावना करने वाले क्रियावान सच्चे सन्तों की सेवा सुश्रुषा व उनके आहार विहार के प्रति सजग रहने की अपील की वही धर्म के नाम को बदनाम करने वाले सन्तों के खिलाफ भी आवाज उठाने की बात कही। इसके साथ ही कोरोना आपदा में आईजा ने जैन समाज के साथ ही मानवसेवा के सद संकल्प के साथ बैठक का समापन किया।