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गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

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महिला नेताओं ने कोरोना वायरस का ज़्यादा प्रभावी और ज़िम्मेदाराना मुक़ाबला किया लेकिन उनकी संख्या इतनी कम क्यों है?

Sajjad Ali Nayane
16 April 2020
ताइवान में कोरोना वायरस की महामारी पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल प्रभावी क़दम उठाए गए और आज यह देश यूरोपीय संघ और अन्य देशों को दसियों लाख की संख्या में मास्क निर्यात कर रहा है।जर्मनी यूरोप में सबसे बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस टेस्टिंग प्रोग्राम चलाने वाला देश बन गया जहां हर सप्ताह साढ़े तीन लाख लोगों का टेस्ट किया जा रहा है और संक्रमित व्यक्ति का बिलकुल शुरुआती स्टेज में पता लगाकर उसे आइसोलेट करके प्रभावी उपचार किया जाता है।
न्यूज़ीलैंड में प्रधानमंत्री ने फ़ौरन टूरिज़्म पर रोक लगाई और पूर देश में एक महीने का लाक डाउन घोषित कर दिया नतीजा यह निकला कि इस देश में कोरोना से केवल चार मौतें हुईं।तीनों ही देशों की तारीफ़ की जा रही है।कि उन्होंने महामारी से निपटने के लिए प्रभावी कार्यशैली अपनाई। तीनों देश धरती पर एक दूसरे से बहुत दूर स्थित हैं। एक यूरोप के

केन्द्र में है दूसरा एशिया में है और तीसरा दक्षिणी प्रशांत सागर में।मगर तीनों में एक चीज़ समान है कि वहां सत्ता की बागडोर महिला के हाथ में है। इन तीनों नेताओं और दूसरी महिला नेताओं ने महामारी जैसी समस्या से निपटने में इतने प्रभावी रूप से काम किया कि इस पर ध्यान दिया जाना ज़रूरी है। अलबत्ता दुनिया में 7 प्रतिशत से भी कम महिला शासक हैं।

तीनों देशों में मल्टी पार्टीज़ डेमोक्रेसी है और जनता को अपने नेता पर काफ़ी भरोसा है। उन्होंने बहुत जल्द वैज्ञानिक रुख़ अपनाते हुए हस्तक्षेप किया। बड़े पैमाने पर टेस्टिंग हुई, अच्छा इलाज मुहैया कराया गया, संभावित संपर्क में आए लोगों पर नज़र रखी गई और लोगों के एकत्रित होने पर कड़ाई से रोक लगाई गई।