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मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

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इमारात ने बदला स्वर, ईरान और सीरिया के बारे में दोस्ती की बातें, क्या पश्चिमी एशिया नई दिशा में बढ़ना चाहता है?

Sajjad Ali Nayane
14 April 2020
हमें यह तो नहीं लगता कि कोरोना वायरस की महामारी और इमारात-सीरिया संबंधों में हो रहे हालिया परिवर्तनों में कोई गहरा संबंध है क्योंकि दोनों देशों के संबंधों के ख़राब होने के जो कारण थे वह अब ख़त्म हो चुके हैं और दूसरी ओर वह एलायंस भी टूट चुका है जिसने सीरिया को निशाना बनाया था।
सऊदी अरब के साथ संयुक्त अरब इमारात का एलायंस ही नहीं टूटा है बल्कि सऊदी अरब और इमारात के बीच टकराव की हद तक प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। इसके एक नहीं अनेक उदाहरण यमन में मिल जाएंगे।
*www.thecurrentscenario.com*
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि संयुक्त अरब इमारात ने ईरान से अपने संबंधों में बड़े बुनियादी बदलाव किए हैं जिसका नतीजा यह निकला है कि पांच साल पहले ईरान और इमारात के बीच जो तनाव था उसका अब कहीं दूर दूर तक पता नहीं है।
वैसे सबसे बड़ी बात तो यह है कि सीरिया हर साज़िश के मुक़ाबले में मज़बूती से डटा रहा और अब वह एक प्रभावशाली अरब देश की अपनी पुरानी भूमिका फिर से हासिल कर चुका है। क्षेत्र में मौजूद उस एलायंस में सीरिया का महत्वपूर्ण स्थान है जो अमरीका, इस्राईल और उनके सारे घटकों को ज़बरदस्त चुनौती दे रहा है। हमारा तात्पर्य वह प्रतिरोधक एलायंस है जिसका नेतृत्व ईरान कर रहा है और जिसमें इराक़, यमन और हिज़्बुल्लाह लेबनान सहित कई देश और संगठन शामिल हैं।
इमारात के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन जाएद ने एक सप्ताह पहले सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद से जो टेलीफ़ोनी वार्ता की उसको इन्हीं नई परिस्थितियों के दायरे में देखना चाहिए। इमारात के विदेशी मामलों के राज्य मंत्री अनवर क़रक़ाश ने भी बयान दिया कि सीरिया इस समय कोरोना वायरस की महामारी से लड़ रहा है तो उसकी मदद करना चाहिए।
इमारात के इस क़दम के बाद अब हमें और भी कई चौंकाने वाली चीजें देखने को मिल सकती हैं। अब इमारात यह मांग कर सकता है कि सीरिया को अरब लीग में वापस लाया जाए। इसी तरह फ़ार्स खाड़ी के दूसरे अरब देश भी अपना रुख़ बदल सकते हैं। इमारात ने यही किया है। उसने टकराव और दुशमनी की नीति छोड़ने का फ़ैसला कर लिया है।
अनवर क़रक़ाश का बयान उस बुलडोज़र की तरह है जो बड़े रास्ते के लिए ज़मीन समतल कर रहा है। अगर कोई इन दिनों इमारात के मीडिया को देखे और ईरान, सीरिया और हिज़्बुल्लाह के बारे में उसके बदले हुए स्वर पर ग़ौर करे तो बहुत कुछ समझ सकता है।