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Sunday, June 21, 2020

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कागजी जूनियर हाईस्कूल में करोड़ो के गबन का मामला

दो वर्ष पूर्ब 2018 में जांच रिपोर्ट आने के बाद भी आखिर गबन कर्ता के खिलाफ क्यो नही हो रही है कार्यवाही ?


उपजिलाधिकारी व खण्ड शिक्षा अधिकारी की जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता एवं गवन की हुई है पुष्टि

डीएम के आदेश पर हुई जाँच , रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही करने से कतरा रहे है बिभागीय अधिकारी

संजय सिंह
सुलतानपुर,21 June 2020
जहा एक तरफ सूबे के मुखिया भ्रस्टाचार खत्म करने में लगें है वही सुलतानपुर जनपद के लम्भुआ तहसील के कोथरा निवाशी सफ़ेदपोश संतोष कुमार सिंह द्वारा स्कूल के नाम पर करोड़ो का घोटाला किया है ।
मामला मामला रामरती सिंह जूनियर हाईस्कूल कोथराकला का है सन 2007 में संतोष कुमार सिंह स्कूल प्रबंधक ने अपने स्कूल की मान्यता ली  मान्यता के समय न तो कोई स्कूल था और न ही कोई भवन था सिर्फ कागजों में स्कूल चला के 2007 से अब तक अल्पसंख्यक कल्याण से करोड़ो की छात्राबृत्ति का घोटाला किया है।जिसकी शिकायत संतोष सिंह के सगे भाई शत्रुघन सिंह ने जिलाधिकारी से किया कि संतोष कुमार सिंह जो कि रामरती सिंह जूनियर हाई स्कूल कोथराकला के मैनेजर है उन्होंने सिर्फ कागज में स्कूल दिखा के करोड़ो का गबन किया है। न तो कोई भवन/बिल्डिंग है और जिसकी नियुक्ति प्रधानाध्यापक पद पर  की गई है उनकी मृत्यु मान्यता के लगभग 20 साल पहले हो चुकी है।

उक्त प्रकरण की जांच तत्कालीन जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को सौंपा जिला बेसिक शिक्षाअधिकारी ने दो सदस्यीय जांच समिति बनाकर रिपोर्ट एक सप्ताह के अन्दर देने का आदेश दिये।उक्त आदेश के क्रम में खण्ड शिक्षाधिकारी लम्भुआ और खण्ड शिक्षा अधिकारी प्रतापपुर कमैचा ने जांच किया और अपनी रिपोर्ट पत्रांक 335/18 दिनांक 22- 11-2018 को जिलाबेसिक शिक्षा अधिकारी को सौप दिया जिसमे जांच कमेटी ने स्पस्ट उल्लेख किया है कि  कोथराकला में इस नाम का कोई भी विद्यालय संचालित/स्थापित नही है।और प्रबंधक संतोष कुमार सिंह सुत श्री अवधेश कुमार सिंह निवासी कोथराकला द्वारा सिर्फ कागजों में विद्यालय चलाया जा रहा है। सब से चौकाने वाली बात यह है कि कथित विद्यालय में जिस सरोज सिंह नाम की महिला को प्रधानाध्यापक बनाकर उसके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर जगह जगह पत्राचार किया गया और लाखों की समाजकल्याण / अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से छात्रबृत्ति व विधायक निधि की धनराशि का  आहरण किया गया साक्ष के आधार पर उस सरोज सिंह की मृत्यु मान्यता प्राप्त के लगभग 20 वर्ष पहले हो चुकी है।
उक्त प्रकरण की जाँच तत्कालीन जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी लम्भुआ से भी कराई थीउपजिलाधिकारी लम्भुआ ने भी अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कहा है कि इस नाम का कोई भी विद्यालय कोथराकला में न कभी था और न संचालित हो रहा है।मामला अत्यन्त गम्भीर होने के बावजूद बिद्यालय प्रबन्धक के खिलाफ  कार्यवाही कोई कार्यवाही न होने पीछे शिकायत कर्ता के अनुसार कही न कही सत्ता पक्ष के कुछ नेताओ का बिभागीय अधिकारियों के ऊपर बनाया गया दबाव तो नहीँ इतना बड़ा गबन व फ्रॉड करने के बाद भी कोई कार्यवाही न होना चिंता का विषय है । जब इस सम्बन्ध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से दूरभाष पर बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नही उठा ।

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