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Monday, June 8, 2020

TCS

ग्रामीण युवा चलती-फिरती दुकान क्यों नहीं चला सकते

   कोरोना लॉक डाउन की वजह से उपजे हालातों से उभरने के लिए प्रयास

  राज्यमंत्री चौ. उदयभान सिंह ने देखी साइकिल पर चलती-फिरती दुकान

Avdhesh Yadav✍️
आगरा,08 June  2020
ग्रामीण युवा चलती-फिरती दुकान चलाकर रोजगार का नया संसाधन क्यों विकसित नहीं कर सकते। एक साइकिल पर चलती-फिरती दुकान चलाकर रोजगार हासिल किया जा सकता है। कोरोना के कहर के बीच लॉक डाउन के चलते उत्पन्न हालातों में किस तरह से रोजगार के नए रास्ते खोले जा सकते हैं, एमएसएमई के मंत्री चौ. उदयभान सिंह इसके लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने शहर के प्रमुख उद्यमी पूरन डाबर के साथ गहन चितंन किया। एक इस तरह की साइकिल का माडल तैयार किया गया है जिस पर चाय-समौसे की चलती-फिरती दुकान चलाई जा सकती है।
राज्यमंत्री चौ. उदयभान सिंह रोजगार के नए रास्ते खोजने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में जर्मनी की प्रमुख जूता कंपनी के आगरा में कारखाना स्थपित करने के प्रयास शुरू हुए थे। इसी क्रम में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए उन्होंने उद्यमियों के साथ विचार-मंथन शुरू किया है कि किस तरह युवाओं को अत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। प्रमुध उद्यमी पूरन डाबर के साथ मंत्रणा करके यह विमर्श किया गया कि स्वरोजगार के कौन से रास्ते खोले जा सकते हैं। उद्यमी पूरन डाबर ने बताया कि एक इस तरह की साइकिल तैयार कराई जा सकती है, जिसे चलती-फिरती दुकान बनाया जा सकता है। इस तरह की कुछ साइकिलें प्रयोग के तौर पर कुछ युवाओं को उपलब्ध कराई जा रही हैं। साइकिल पर चाय की दुकान के लिए छोटा सा चूल्हा इस पर फिट किया जा सकता है और समौसे आदि को गर्म रखने के लिए हाट केस लगाया जा सकता है। उद्यमी पूरन डाबर ने माडल के तौर पर इस तरह की साइकिलें तैयार कराई हैं। जरूरतमंद युवा अपने हुनर का लाभ किस तरह से हासिल करके खुद को आत्मनिर्भर बनाएं, इस दिशा में और भी प्रयास किए जा रहे हैं।
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ईगो छोड़ना पड़ेगा युवाओं को

कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता। यदि युवाओं में यह सोच विकसित हो जाए तो इसका बड़ा लाभ युवाओं को अत्मिनिर्भर बनने में मिल सकता है। दरअसल ग्रामीण युवा पुलिस का सिपाही बनकर नौकरी करना तो खुशी-खुशी स्वीकार कर लेता है, लेकिन साइकिल चलाकर चाय-समौसे की चलती-फिरती दुकान चलाना, उसे छोटा काम लगता है। राज्यमंत्री चौ. उदयभान सिंह ने कहा कि युवाओं की इसी सोच को बदलने के प्रयास किए जाने चाहिए। कोरोना के कहर के कारण गंभीर स्थितियां हैं। बड़ी संख्या में प्रवासी शहरों को छोड़कर अपने घर-गांव लौटे हैं। ऐसे में उनके पास रोजगार भी नहीं हैं। इन परिस्थितयों में उन्हें स्वरोजगार की दिशा में सोचना चाहिए। उनका विभाग युवाओं को अपना रोजगार स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार सूक्ष्म और लघु उद्योगों को बढ़ावा दे रही है, ताकि अधिक से अधिक रोजगार के अवसर युवाओं को मुहैया हो सकें।