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Tuesday, June 16, 2020

TCS

कभी भी हो सकती है बेजुबान जानवरों के साथ ह्रदय विदारक घटना

कहीं मनुष्य की लापरवाही छीन न ले बेजुबान जानवर की साँसे

मनुष्य का रक्षक (डॉक्टर) बन सकता है बेजुबान जानवरों का भक्षक


पवन सक्सेना/एस.पी.तिवारी
गोला गोकरननाथ-खीरी,16 June 2020
हाल ही मे हृदय को झकझोर देने वाला मामला सामने आया था जिससे किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा हथिनी को धोखे से बम खिला देने से उस  हथिनी व उसके गर्भ मे  पल रहे हथिनी के बच्चे की तड़प तड़प कर मौत हो गई थी जिसको लेकर कई नेता, अभिनेता,  समाजसेवी व देश के नागरिकों ने शोक प्रकट किया था लेकिन यह  सिर्फ और सिर्फ औपचारिकताएं ही बनकर रह जाती है क्योंकि इस प्रकार की लाख कोशिशो के बावजूद भी मनुष्य कहीं ना कहीं ऐसी हरकतें जरूर कर बैठता है जिससे बेजुबान जानवरो  के साथ ऐसी ह्रदय विदारक घटनाए होती रहती है। फिलहाल मनुष्य की जानवरों के प्रति  संवेदनहीनता का जो एक मामला प्रकाश में आया है वह वाकई में बहुत ही निंदनीय है आपको बताते चलें कि जिला लखीमपुर खीरी की तहसील गोला गोकरण नाथ मे समाजसेवी रजनीश गुप्ता की देखरेख में चल रहे एक सोशल मीडिया ग्रुप समस्या समाधान परिवार की एक पोस्ट के माध्यम से ऐसा देखा गया है कि विकास चौराहे से मोहम्मदी बाईपास रोड पर एक जगह किसी अस्पताल या मेडिकल स्टोर के द्वारा बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में ही फेंक दिया गया जिसमे एक गोवंश कुछ खाने पीने की तलाश कर रहा है। जिस प्रकार से फोटो में देखा गया है इसमें साफ साफ ऐसा लग रहा है कि यह काम विकास चौराहे से मोहम्मदी बाईपास रोड पर स्थित किसी क्लीनिक या मेडिकल स्टोर का है।
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फिलहाल इस के पीछे कोई भी हो लेकिन ऐसी लापरवाही से भविष्य में किसी जानवर के साथ कभी भी कोई हृदय विदारक घटना घट सकती है। जिसके उपरांत पूर्व की भांति लोग सिर्फ और सिर्फ अफसोस ही जाहिर कर पाएंगे लेकिन अगर समय से पहले संबंधित जिम्मेदार इस पर ध्यान दें तो भविष्य में होने वाली ऐसी हृदय विदारक घटना को टाला जा सकता।
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गौरतलब बात यह है कि इस प्रकार की लापरवाही आए दिन कहीं ना कहीं देखने को मिलती रहती है लेकिन इससे संबंधित जिम्मेदार के संज्ञान मे ऐसी जानकारी नहीं आ पाती है।आपको बताते चलें कि अभी बीते दिनो संपूर्ण जिले में स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने जिले भर के तमाम चल रहे मानक विहीन पात्रता वाले अस्पतालों को चेक किया व नोटिस चस्पा की लेकिन नोटिस चस्पा करने के बाद भी बहुत से अस्पतालो के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई और जिन अस्पतालों पर कार्यवाही हुई और उन को सीज किया गया उनमें से कुछ अस्पतालों ने तो कुछ दिन के बाद ही अस्पताल को खोल लिया।स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम में अस्पतालों की मानक पात्रता से संबंधित सभी मानकों को जांचा था जिसमें गोला नगर मे संचालित बहुत से प्राइवेट अस्पतालों में भारी अनियमितताएं मिली इतना ही नहीं अधिकतर अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट ही नहीं मिला जिससे  गोला नगर मे संचालित कुछ अस्पताल वा क्लीनिक के डॉक्टर तो बिना डिस्पोज किए। हुए बायोवेस्ट को सार्वजनिक खुला डाल देते हैं जिससे भविष्य में किसी भी गोवंश के साथ दर्दनाक घटना हो सकती है। फिलहाल जिस प्रकार से फोटो में बायो वेस्ट जैसे कि नीडल,पॉलिथीन,कांच की शीशी, और कांच के टुकड़े देखे जा रहे हैं इससे साफ साफ लगता है कि बायो मेडिकल वेस्ट को खुले मे फिकवाने का काम किसी अस्पताल के डॉक्टर के द्वारा ही कराया गया है। सोचने वाली बात यह है कि यह कैसी विडंबना है कि मनुष्य का रक्षक यानी कि डॉक्टर बन सकता है बेजुबान जानवरों का भक्षक।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखीमपुर से बात करने पर उन्होंने मामले को संज्ञान में लेकर उचित कार्यवाही करने के लिए कहा।

इस बाबत पर एसडीएम गोला अखिलेश यादव ने कहा कि इस प्रकार की जानकारी तुरंत सूचित करें,मैं मौके पर जाकर तत्काल एक्शन लूंगा।