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Saturday, May 23, 2020

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कानपुर में झोलाछापों के आगे नसमस्तक स्वास्थ विभाग

TCS News Network
23 May 2020
"नीम हकीम ख़तरा-ए- जान" एक मुहावरा जिसका अर्थ सरल भाषा में एक ऐसा व्यक्ति जिसका चिकित्सा के पेशे/क्षेत्र में अधूरा ज्ञान होना, जिस से इलाज करा आप डाल रहे है अपनी जान जोख़िम में।
जैसा कि हम सब भलीभांति जानते है कि वर्तमान समय हर ज़ुबान एक ही नाम का उच्चारण कर रहा है वैश्विक महामारी कोरोना वायरस जिस का प्रकोप इतना प्रचंड है कि बीते दो माह से देश दुनिया कही आधे तो कही पूरे  लॉक डाउन के कारण जीवन रक्षा हेतु बन्द है। क्यो की जान है तो जहान है।
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कोरोना का खतरा कहा कितना

कानपुर नगर आगरा के पश्चात यूपी का दूसरे नंबर का शहर जो कोविड 19 से सर्वाधिक प्रभावित रहा और अभी भी है। यहाँ इस महामारी के चलते 10 लोग अपनी जान गवा चुके है, 28 एक्टिव केस अभी भी है सवा तीन सौ से अधिक संक्रमित लक्षणों के लोग अभी भी कॉरेन्टीन है एवं पौने तीन सौ की उपचार के पश्चात घर वापसी भी हो चुकी है। जो की आशावादी परिणाम है, सभी कोरोना योद्धाओं को उनके अथक प्रयासों के लिए समस्त देशवाशियो की ओर से साधुवाद।

परंतु एक और जहाँ सब ठीक हो जीवन की गाड़ी पटरी पर लौट रही है भले धीरे धीरे ही सही कोरोना योद्धाओं शासन प्रशासन के अथक प्रयासों के फल स्वरूप वही दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग भी है जिनको किसी बात का फ़र्क़ नही पड़ता जिनके लिए मानव जीवन और शरीर मात्र धन उगाही या अंग्रेज़ी उच्चारण में ए टी एम है।  जहाँ खाते में पैसे की न बाध्यता है न ही कार्ड की दिक्कत सिर्फ़ हुनर होना चाहिए सामने वाले के भय और अज्ञान का फायदा उठाने का बस फिर क्या चलता फिरता ए टी एम तैयार करते रहो उतारबाज़ी।

हम बात कर रहे है झोलाछाप डॉक्टरों की जिनका मकड़जाल इतना सुदृढ़ है कि मजाल है जो क्षेत्रीय चौकी थाना हो या स्वास्थ विभाग कोई इन पर नज़र डाल लें हाथ डालना तो दूर की बात है।
कोरोना जैसी महामारी के समय में भी इन धन लोभियों की भूख नही हो रही कम, संक्रमण के सभी लक्षणों की अनदेखी कर मरीज़ों एवं तीमारदारों को सरकारी भय दिखा कर रहे ज़ुकाम बुख़ार खाँसी पेटदर्द श्वास लेने में परेशानी का उपचार बिना किसी थर्मल स्कैनिंग के। न कोई पी पी ई किट न कोई सोशल डिस्टनसिंग छोटी छोटी जगहों पर गुलुकोज़ से लेकर प्रसव तक करने का इंतेज़ाम पूरा का पूरा नर्सिंग होम दोहरा काम जनता के साथ सरकार को भी चुना। सारे नियम कानून अपनी जेब मे क्योंकि कही न कही किसी न किसी का संरक्षण प्राप्त होता है इन जैसे झोलाछापों को।

बात अति गंभीर मुद्दे की

इन ही में से एक जोड़ी है पिता पुत्र की झोलाछाप रमा शंकर एवं पुत्र राजन हटी जो थाना कलक्टरगंज अंतर्गत कोपरगंज चौराहा ठीक चाचा नेहरू अस्पताल के सामने मुख्यमार्ग पर कुछ रसूखदारों एवं पतलकरो के संरक्षण में लोगो की जान से खिलवाड़ कर रहे है। आप को हैरानी होगी जिस मीडिया के सामने बड़े बड़ो की बोलती बंद हो जाती है यह झोलाछाप उनको भी आंखे दिखाने में नही करता संकोच, देख लेने और उखाड़ लेने जैसे शब्दों का करता है प्रयोग।
इन बाप बेटे झोलाछाप रमा शंकर और उसका पुत्र राजन हटी जो पढ़ाई में दहाई का अकड़ा भी नही पार कर पाया है किसी भी स्तर पर करते है लोगो का इलाज, यह बाप बेटे जो बरसो से बिना किसी शैक्षिक योग्यता, मेडिकल परीक्षा उत्तीर्ण करे सर के बाल से लेकर पाँव के नाखूनों तक का इलाज बिना किसी हिचक के निःसंकोच हो कर करते आ रहे है। कोई बाध्यता नही 1 दिन का बच्चा हो या उम्र के आखरी पड़ाव का वृद्ध, गर्भवती महिला हो या मधुमेह टीबी दमे मिर्गी रक्तचाप का मरीज़, गोली लगे या कील, ज़हर पिये आशिक़ को भी जो कर देता है ठीक लेकिन कोई गैरंटी नही न कोई हो हल्ला बच गया तो जय श्री राम मर गया तो राम नाम। बस पैसा होना चाहिए आप की जेब में क्योंकि सूत्रों अनुसार अक्सर पैसा इन बाप बेटे के बीच भी बन जाता है विवाद का कारण लग जाता है स्लाटर हाउस पर ताला।
इन दोनो की शैक्षिक योग्यता कितनी है, इस का प्रमाण तो सिर्फ़ इनके मैट्रिक और इंटर के प्रमाणपत्र ही दे सकते है, जो कि सिद्ध करेगें की गलत कौन है इलाज कर रहे झोलाछाप यह दोनों पिता पुत्र, आंखों पर पट्टी बांधे ज़िला प्रशासन यह बार बार सूचित करने एवं साक्ष्य उपलब्ध कराने पर भी कार्यवाही से बचता कानपुर नगर का स्वास्थ्य विभाग या फिर वह सूत्र/पत्रकार जो समाज में फैली इस गंदगी को दूर कर जनता के प्राणों की रक्षा करने का प्रयास कर रहे है खबर चलाने पर देख लेने और उखाड़ लेने की धमकियों के बीच निडर हो कर जमे है कोरोना काल में बिना की लोभ लालच न कोई आर्थिक सहायता। फिर भी न जाने क्यों स्वास्थ विभाग के कानों पर नही रेंग रही कोई जू या किया जा रहा है इन जैसे के द्वारा कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने का इंतज़ार।
जो भी हो स्वास्थ विभाग की हिलावली का क्या कारण है जो बार बार विभिन्न माध्यमों से सूचित करने पर भी कार्यवाही को कोरोना का व्यस्था बता टालता नज़र आया। ज़िला प्रशासन का भी कुछ ऐसा ही हाल है मीटिंग और फ़ोटो ज्ञापन भी प्रोटोकॉल का हिस्सा है। परंतु हम अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाहन समाजहित, जनहित, मानवता एवं मासूमों के प्राणों की रक्षा हेतु अपने लिए गए संकल्प एवं पत्रकारिता की गौरान्वित मर्यादा को जीवित रखते हुए ऐसे सभी कोरोना विक्रेता झोलाछापों को उनके अंजाम तक पहुँचा कर ही दम लगे।