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Thursday, May 28, 2020

TCS

कोरोना महामारी में प्लास्टिक डिस्पोजल बना वरदान -
किसी का भी इस ओर नही है ध्यान

कोरोना पीपीई किट से लेकर मास्क भी सिंगल यूज प्लास्टिक से निर्मित

ब्यूरोचीफ रहीम शेरानी
झाबुआ,28 May 2020
नोवल कोविड 19 ने एक बार फिर प्लास्टिक डिस्पोजल की मांग ओर इसका उपयोग बढ़ा दिया है।
राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ राहत कार्यों में शामिल स्वयंसेवी संगठन प्रवासी मजदूरों, दैनिक मजदूरी श्रमिकों व कोरोना ग्रस्त क्षेत्रों आदि में खाद्य अथवा अन्य सामग्री वितरित करने के लिए प्लास्टिक बैग का उपयोग बेतहाशा कर रहे हैं,
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यही नही कोरोना संक्रमण से रोकने के लिये डॉक्टरों के लिये बनने वाली पीपीई किट, दस्तानें व मास्क तक प्लास्टिक के बन रहे है। कम रेट के चक्कर में मुँह के लिये उपयोग में लाये जाने वाले मास्क में तो सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है जो कोरोना से बचाए या न बचाये कैंसर को आमन्त्रण जरूर दे सकता है।
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भारत के प्लास्टिक उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में हल्का प्लास्टिक जिसमें 200 ग्राम से 1 किग्रा तक कि सामग्री आसानी से आ जाये उनकी मांग बड़ी है जिसका कारण कोरोना के कारण हरी सब्जी आदि अनेक वस्तुओं में इसका उपयोग बढ़ गया है।
वैसे तो अभी होटल आदि बन्द है बावजूद इसके शासकीय प्रतिष्ठानों में भी चाय आदि में डिस्पोजल ही उपयोग किये जा रहे है।
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 अर्थात यू कहा जाए कि कभी प्रतिबंधित किया जाने वाला घातक प्लास्टिक आज कोरोना संक्रमण से बचाव के रूप में देखा जा रहा है, आमजन ने एकल उपयोग प्लास्टिक बैग के पक्ष में अपने पुन: प्रयोज्य जूट और कपड़ा ढोना बैग को छोड़ दिया है ताकि उपयोग के तुरंत बाद उन्हें निपटाया जा सके।

भारत के लिये घातक रहा प्लास्टिक आज एक "कोरोना योद्धा" है जो भविष्य के लिये खतरा है

सिंगल यूज प्लास्टिक देश के लिये घातक रहा है लेकिन वर्तमान समय मे यह एक कोरोना योद्धा है यह एक वाक्यांश व्यापक रूप से घातक वायरस के खिलाफ अच्छी लड़ाई लड़ रहे लोगों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
लेकिन भारत में रिसाइक्लिन प्रक्रिया अत्यंत खराब होने से इसे प्रतिबंधित किया गया था।
देश के प्रधानमंत्री से लेकर अनेक समाजसेवी संगठनों ने सिंगल यूज प्लास्टिक के घातक परिणामों को जानते समझते हुए इसे प्रतिबंधित करने व इसके बदले कपड़े व जुट के झोलें व कागज की थैलियों के उपयोग पर बल दिया था लेकिन आज उनकी सारी मेहनत भी बेकार हो रही है। देश कोरोना को तो हरा देगा परन्तु यदि आज सिंगल यूज प्लास्टिक को न रोका गया तो आगे चलकर यह भी एक भयानक बीमारी को जन्म दे सकता है जिससे उबर पाने में भी समय लगेगा।