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Sunday, May 31, 2020

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सालभर में 29.17 प्रतिशत तक आई थी अपराधों में गिरावट ।

अली असगर बोहरा
झाबुआ,31 May 2020
मध्यप्रदेश पश्चिमी मप्र के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के लिए अच्‍छी खबर है। पुलिस की सजगता से अपराधों के ग्राफ में तेजी से गिरावट आ रही है। वर्ष 2018 से 2019 के बीच एक साल में जहां 29.17 प्रतिशत तक अपराध कम हुए थे तो वहीं पिछले पांच महीने में आपराधिक आंकडे में 5.61 फीसदी की गिरावट आई है।
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सबसे अच्छी बात ये हैं कि एक तरफ जहां पूरे देश में बालिकाओं व महिलाओं के साथ बलात्‍कार, छेडछाड और अपहरण की घटनाएं बढती जा रही है तो वहीं झाबुआ जिले में महिला संबंधी अपराधों में तेजी से गिरावट आ रही है। यदि आंकडो पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2018 से 2019 के बीच बलात्‍कार के मामलों में 54.38 प्रतिशत तो अपहरण के प्रकरणों में 60 फीसदी तक कमी आई। छेडछाड की  घटनाएं भी कम हुई है। इस तरह के अपराध 64.86 प्रतिश्‍त कम हुए हैं। यदि वर्ष 2020 के शुरुआती पांच महीने के आंकडो को देखे तो बलात्‍कार की महज 9 घटनाएं हुई। इसी तरह अपहरण की 22 और छेडछाड के 12 मामले सामने आए। दरअसल ये सब रातोंरात नहीं हो गया। इसके लिए एसपी विनीत जैन ने अलग अलग अभियान चलाए। सबसे ज्‍यादा असर एसपी के द्वारा अपनेस्‍तर पर तैयार करवाई गई महिला जागरूकता एवं सुरक्षा अभियान पर केंद्रीत शॉर्ट फि‍ल्‍म भूल एक नसीहत का सार्वजनकि स्‍थानों के साथ शैक्षणिक संस्‍थाओं में प्रदर्शन करवाया गया। जिससे स्‍कूल व कॉलेज की छात्राओं के साथ छात्रों में भी जागरूकता आई। उन्‍हें समझ में आ गया कि कम उम्र में यदि कोई गलत कदम उठा लिया तो भविष्‍य खराब हो सकता है। जिसका परिणाम हुआ कि महिला संबंधी अपराधों में तेजी से गिरावट आती चली गई। यदि आंकडो की बात करें तो वर्ष 2017 में हर महीने महिला संबंधी अपराध सेजुडे औसत 41 मामले दर्ज हो रहे थे। 2018 में आंकडा औसत 35 पर पहुंचा। वर्ष्‍ 2019 में औसत हर महीने केवल 14 मामले सामने आए। वहीं 2019 में औसत हर महीने महज 8 प्रकरण ही दर्ज हुए। यानी कहीं न कहीं पुलिस सजग हुई तो लोग भी जागरूक हुए। जिससे इस तरह की घटनाओं में कमी आई है।

नाबालिग छात्रा पर केंद्रीत है शॉर्ट फि‍ल्‍म

शॉर्ट फि‍ल्‍म भूल एक नसीहत एक नाबालिग छात्रा पर केंद्रीत हैत्र इसमें एक मध्‍यम वर्गीय परिवार को दिखाया गया है। एक दंपति जिनकी 17 साल की इकलौती बेटी स्‍कूल में पढती है। रास्‍ते में आते जाते वक्‍ एक लडका उसे परेशान करने लगता है। लड़की ये बात अपने माता पिता को बताती है लेकिन माता पिता उसकी बात को नजर अंदाज कर देते हैं। बाद में लडकी उस लडके के बहकावे में आ जाती है और किस तरह से माता पिता परेशान होते हैं। कहानी मे माता पिता की क्‍या गलती है और पुलिस किस तरह से समाज के लिए कार्य करती है यह सब बताया गया है।

आंकडो में जानिए किस तरह से अपराधों में कमी आती चली गई

वर्ष 2017 में बलात्‍कार के 113, अपहरण के 243 और छेडछाड के 141 प्रकरण दर्ज हुए। यानी हर महीने औसत 41 महिला संबंधी अपराध दर्ज किए गए।

वर्ष 2018 में अपराधों में कुछ गिरावट आई। इस साल बलात्‍कार के 84, अपहरण के 225 और छेडछाड के 111 प्रकरण दर्ज हुए। महिला संबंधी अपराधों से जुडी कुल 420 घटनाएं हुई। इस लिहाज से हर महीने औसत 35 प्रकरण दर्ज किए गए।

वर्ष 2019 में बलात्‍कार के 40, अपहरण् के 90 और छेडछाड के 39 मामले आए। महिला संबंधी अपराधों से जुडी 169 घटनाएं हुई। यदि औसत निकाले तो महीने में महिला संबंधी अपराधो से जुडे केवल 14 प्रकरण आए।

वर्ष 2020 में बलात्‍कार के 9, अपहरण के 22 और छेडछाड के 12 प्रकरण दर्ज हुए। यानी हर महीने महिला संबंधी अपराधों से जुडे 8 मामले ही सामने आए। यह अब तक की सबसे बडी गिरावट है।

हर तरह के अपराधो में आ रही है कमी

अच्‍छी बात ये है कि जिले में केवल महिला संबंधी अपराध ही नहीं बल्‍की अन्‍य सभी अपराधों में भी कमी आ रही है। इसमें हत्‍या, डकैती, लूट, ग्रह भेदन व साधारण चोरी के प्रकरण शामिल है। यह जिले के लिए एक बडी उपलब्‍धि है। इसके लिए पूरे स्टाफ की अहम भूमिका रही है।

विनीत जैन, एसपी, झाबुआ

इस तरह गिरता गया अपराधों का ग्राफ
अपराध 2017 2018 2019 2020,हत्‍या 21 30 25 09,हत्‍या का प्रयास 16 11 13 08,डकैती 00 03 00 00,डकैती की तैयारी 01 00 08 00,लूट 23 35 29 02,चैन स्‍नेचिंग 02 02 00 00,ग्रह भेदन 88 63 54 12,साधारण चोरी 64 46 38 06,वाहन चोरी 172 180 152 43,पशु चौरी 15 08 08 01,बलवा 44 25 22 08,बलात्‍कार 113 84 40 09,अपहरण 243 225 90 22,छेडछाड 141 111 39 12,अन्‍य 3057 2388 1739 659,
योग 4000 3211 2257 791
नोट वर्ष 2020 के आंकडे मई तक के हैं।