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Friday, May 29, 2020

TCS

एस.पी खीरी हो गई गुलरिया का फूल, मिलने को दिन दुर्लभे हुए


चार दिन से मिलने को प्रयासरत पत्रकारों से भी नहीं मिली मैडम

टेलीफोनिक वार्ता भी नहीं करती तेज तर्रार कप्तान,सी.यू.जी रखते हैं पी.आर.ओ साहब

नित्यानंद बाजपेयी
लखनऊ,29 May 2020
जिला खीरी की काफी तेज तर्रार कप्तान के जनपद में अपराधिक वारदातों की बाढ़ सी आ गई और जबकि कप्तान आए दिन अपने मातहतों के पेंच कसा करती हैं लेकिन इनके फरमानों का असर उनके मातहतों पर असर पड़ता नजर नहीं आ रहा है।मद में मदहोश पुलिस मनमानी पर आमादा रहते हुए फर्जी मुकदमा लिखने में ज्यादा जोर और वास्तविक पीड़ितों की रिपोर्ट नहीं लिखी जा रही है।जिसके लिए पीड़ित पुलिस अधीक्षक महोदया की चौखट के चक्कर काटते थके जा रही है और एस.पी.खीरी के दर्शन भी नही हो पा रहे हैं।फरियादियो ने यहा तक कहना शुरू कर दिया है कि एस.पी.साहिबा "गुलरी का फूल" हो गई।
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ऐसे में न्याय मांगने को आदमी कहा जाये।एस.पी. साहिबा के दो माह से लगभग न मिल पाने की चर्चा आम हो रही है।ऐसा ही एक मामला कोतवाली में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 0643/2020 जो पूर्णतया मनघड़ंत रचना कारित कर कोतवाली पुलिस की सांठगांठ से फर्जी मुकदमा दर्ज किए जाने की चर्चाओं का बाजार गर्म होने पर इस मामले में मैडम से मिलकर बात करने व साक्ष्यों को दिखाने के लिए 4 दिन तक प्रयास किया जाता रहा पर कप्तान साहिबा ने शायद मिलना उचित नहीं समझा उनका फोन पी.आर.ओ साहब उठाते रहे और कोई न कोई बहाना बताकर टालते रहे जब पत्रकारों का यह हाल है तो आम फरियादिओ का क्या हाल होगा ? आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार महोदया जिले को अपने हिसाब से चलाना चाहती है।शासन के शासनादेश व आलाअधिकारियों के आदेश उनके लिए कोई मायने नहीं रखते हैं।अब तक जिले में 25 पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।जिनमें से अधिकांश एस.पी साहिबा की नाक के नीचे कोतवाली सदर में दर्ज हुए हैं अपराध के आंकड़ों को कम करने की बाजीगरी में माहिर महोदया को ना तो फर्जी मुकदमे दर्ज दिखाई पड़ रहे हैं। और ना ही कोतवाली सदर में कुछ पुलिस अफसरों के मुंह लगे खबरनीसो द्वारा दिन रात की जा रही दलाली ही दिखाई पड़ रही है।इन्ही पत्रकारों के कहने पर एक एस. एस.आई व अपराध निरीक्षक पान सिंह द्वारा जिले की उभरती महिला कलमकार से दुर्व्यवहार कर सरेआम अश्लील शब्दों से नवाज कर अपमानित कर डाला गया और आज तक मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई।सूत्रों की मानें तो कप्तान लांक डाउन घोषित होने के बाद से कोरोना जैसी गंभीर बीमारी के चलते लोगों से मिलना तो दूर आफिस मे बैठना उचित नहीं समझा जबकि डीएम साहब प्रतिदिन कार्यालय में मौजूद रहे।शायद उनके लिए कोरोना के भय से ज्यादा महत्वपूर्ण कर्तव्य को समझा हो।ऐसे में अब जनता कहां जाए और किससे करें अपनी फरियाद" अपने आप को कोसे या फिर सरकार को इन सब बातों की जानकारी फिलहाल शासन व डीजीपी मुख्यालय को भी दी गई है।देखना है अब ऊट किस करवट बैठेगा या यूं ही चलती रहेगी महान कलमकारों की सांठ-गांठ या फिर कोतवाली से हटेगा जमावड़ा और शासन की मंशा अनुसार प्रतिदिन आफिस में बैठकर सुनेगी जनता की फरियाद।