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Wednesday, April 15, 2020

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युद्ध विराम की घोषणा के बाद यमन के मोर्चों पर क्यों तेज़ हो गए हैं सऊदी हमले? सैनिक गतिविधियां बढ़ाने का कारण क्या है? क्या हासिल करना चाहती है रियाज़ सरकार?

Sajjad Ali Nayane✍️
16 April 2020
सऊदी अरब ने यमन में संघर्ष विराम का एलान तो कर दिया लेकिन देखने में आ रहा है कि सारे मोर्चों पर लड़ाई तेज़ हो गई है। सऊदी अरब की ओर से यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन पर और अंसारुल्लाह आंदोलन की ओर से सऊदी अरब पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है।
अंसरुल्लाह की ओर से इस हफ़्ते कई बार एलान किया गया कि सऊदी अरब ने हमले रोके नहीं हैं बल्कि और तेज़ कर दिए हैं।सऊदी अरब ने पूर्वी यमन की ओमान से मिलने वाली सीमा के क़रीब भारी संख्या में सैनिक, बक्तरबंद गाड़िया और भारी हथियार भी भेजे हैं। सैनिकों के इस जमावड़े को देखकर लगता है कि बड़ा सैनिक टकराव शुरू होने जा रहा है।
कुछ सूत्र कहते हैं कि इस पैमाने पर सैनिक गतिविधियां अंसारुल्लाह पर दबाव डालने के लिए हैं ताकि वह वार्ता की मेज़ पर रियाज़ सरकार की शर्तें माने।इस समय बैज़ा प्रांत में सरवाह, क़ानिया, अलज़ाहिर,  तइज़्ज़ में पश्चिमी इलाक़ों जबकि सअदा में अलमलाहीज़ के इलाक़े में सऊदी सीमा के क़रीब झड़पें तेज़ हो चुकी हैं। मगर इनका यह मतलब नहीं है कि सऊदी अरब युद्ध को लंबा खींचने का इरादा रखता है।
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हालात को देखकर यही लगता है कि सऊदी अरब अब युद्ध रोकने की ओर बढ़ रहा है क्योंकि अमरीका का भी दबाव है कि वहां होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले जब कोरोना की महामारी भी भीषण रूप धारण कर चुकी है तो युद्ध की आग समाप्त हो जानी चाहिए। इसके अलावा दूसरा कारण यह है कि तेल की क़ीमतें गिर जाने से सऊदी अरब के ऊपर युद्ध से भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है। ख़ुद सऊदी अरब को भी कोरोना महामारी का सामना है।

ख़बरें आ रही हैं कि मसक़त में अंसारुल्लाह और सऊदी अरब के बीच सक्रिय रूप से अप्रत्यक्ष वार्ता हो रही है। इस समय वार्ता में कोशिश हो रही है कि युद्ध रुक जाए और इसके साथ ही राजनैतिक वार्ता की प्रक्रिया भी शुरू हो जाए।

अंसारुल्लाह इस पर तैयार नहीं है कि केवल युद्ध विराम हो बल्कि उसकी मांग है कि युद्ध विराम हो तो इसके साथ सऊदी अरब यमन की नाकाबंदी भी समाप्त करे। अंसारुल्लाह का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र संघ कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए संघर्ष विराम पर ज़ोर दे रहा है तो जब तक नाकाबंदी समाप्त नहीं होगी उस समय तक कोरोना वायरस से संघर्ष संभव नहीं होगा।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यमन के भीतरी पक्षों की ओर से उसे अच्छे इशारे मिले हैं और राजनैतिक प्रक्रिया शुरु करने और यमनियों की पीड़ा कम करने के लिए आर्थिक और मानवीय सहायता पहुंचाने का रास्ता साफ़ होता दिखाई दे रहा है।
सऊदी अरब युद्ध तो रोकना चाहता है लेकिन कोई क़ीमत अदा करने के लिए तैयार नहीं है। सऊदी अरब ने यमन युद्ध शुरू करके इस देश को भारी नुक़सान पहुंचाया है जिसकी क़ीमत उसे हर हाल में अदा करनी होगी।