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Thursday, April 16, 2020

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क्यों कोरोना दुनिया के लिए एतिहासिक मोड़ है? क्या कोरोना के बाद बंट जाएगी दुनिया, ब्रिटिश दार्शनिक की राय

Sajjad Ali Nayane
17 April 2020
ब्रिटेन के दार्शनिक जॅान गेरी ने “ न्यू स्टेटस मैन “ पत्रिका में अपने एक लेख में लिखा है कि वीरान सडकें फिर से आबाद हो जाएंगी लेकिन संभावित रूप से दुनिया जैसा हम पहले सोचते थे वैसी नहीं रहेगी।यह घटना, कोई संकट नहीं बल्कि इतिहास में एक अहम मोड़ साबित होगी।अब एसा लग रहा है कि भमंडलीकरण का दौर खत्म हो चुका है। भविष्य में संभव है कि वह अर्थ व्यवस्था कम नज़र आए जिसमें विभिन्न देशों में एक दूसरे से जुड़ी इकाइयों का जाल फैला हुआ होता है। हमेशा भाग दौड़ से भरी ज़िदंगी गुज़ारने का तरीक़ा भी संभावित रूप से बदल जाएगा। शारीरिक रूप से हमारा जीवन अतीत की तुलना में अधिक सीमित और अधिक काल्पनिक हो जाएगा।

दुनिया में बिखराव बढ़ जाएगा और कई आयामों से लोगों में लचक कम हो जाएगी।कोरोना के बाद जो दुनिया सामने आएगी वह अतीत से बहुत मिलती जुलती होगी लेकिन यह तो निश्चित है कि भूमण्डलीकरण की जो प्रक्रिया है वह धीमी हो जाएगी और यह भी निश्चित है कि कोरोना वायरस ने विश्व की अर्थ व्यवस्था की बहुत सी कमज़ोरियों को पूरी तरह से उजागर कर दिया है और इससे यह भी पता चल गया कि उदारवादी पुंजीवादी व्यवस्था में कैसी विनाशकारी कमज़ोरियां हैं।अभी जो हालात पैदा हुए हैं उसके बाद यह निश्चित है कि कोरोना के बाद चिकित्सा साधनों को चीन में या किसी भी गैर उदारवादी देशों में बनाने की बात पश्चिम स्वीकार नहीं करेगा।

कोरोना के बाद की दुनिया में चिकित्सा और अन्य ज़रूरी उपकरणों को पश्चिम कहीं और बनाने की अनुमति नहीं देगा और अब यह विचार कि ब्रिटेन जैसा कोई देश उदाहरण स्वरूप कृषि का काम बंद करके कृषि उत्पादों के आयात पर निर्भर हो सकता है, पूरी तरह से अस्वीकारीय हो जाएगा। लोग कम यात्रा करेंगे जिससे एयर लाइनों को भारी नुकसान होगा। कोरोना के बाद विभिन्न देश अपनी सीमाएं अधिक कड़ाई के साथ बंद कर देंगे।कोरोना के बाद की दुनिया में उत्पादन में विस्तार को कोई उद्देश्य नहीं बनाएगा और
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आबादी में वृद्धि भी रुक जाएगी। आज के उदारवादियों से बहुत पहेल स्टीवार्ट मेल ने अधिक आबादी के खतरे को महसूस करते हुए लिखा था कि इन्सानों से भरी दुनिया, पेड़ पौधों और जानवरों से खाली होगी। कोरोना के बाद बनने वाली नयी दुनिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी और विभिन्न देश अपने अपनी जनता को सब से अधिक महत्वपूर्ण समझेंगे और जो सरकारें इस प्रकार नहीं सोचेंगे उन्हें बुरी तरह से विफलता मिलेगी। कोरोना ने बहुत बड़े बड़े परिवर्तन किये हैं तेल की कीमत ने सऊदी अरब के भविष्य को ही खतरे में डाल दिया है लेकिन इन हालात में भी पूर्वी एशिया में विकास निश्चित रूप से जारी रहेगा। कोरोना के सामने सब से अधिक सफलता से अब तक दक्षिणी कोरिया, ताइवान और सिंगापुर ने संघर्ष किया है लेकिन इस  बात पर विश्वास करना कठिन है कि इस युद्ध में उनकी पारंपरिक रीति रिवाजों ने कोई भूमिका नहीं निभाई है। अब अगर यह देश, पश्चिमी देशों  से अधिक सफलता के साथ भूमंडलीकरण का काम शुरु करें तो हैरत की बात नहीं होना चाहिए। चीन का रुख सारे देशों  से अधिक जटिल है। कोरोना वायरस के दौरान चीन की गतिविधियों को परखना बहुत कठिन काम है और फिर वह प्रजातांत्रिक देशों के लिए आदर्श भी नहीं हो सकता।फिलहाल पूरी दुनिया आइसोलेशन में है और इसका एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें सोचने का खूब अवसर मिलता है और इस तरह से हम एक बदली हुई दुनिया में जीवन व्यतीत करनेकी तैयारी कर सकते हैं।