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Thursday, November 14, 2019

Ardogan on an historic trip to Washington, how long will Ardogan keep trying to sit on American and Russian chairs together? What friendship will feed the two sons-in-law?

अर्दोगान वाशिंग्टन की एतिहासिक यात्रा पर, कब तक एक साथ अमरीकी व रूसी कुर्सियों पर बैठने की कोशिश करते रहेंगे अर्दोगान? दो दामादों की दोस्ती क्या गुल खिलाएगी?

15-Nov-2019
Friday World
Sajjad Ali Nayani
रूसी राष्ट्रपति विलादमीर पुतीन और उनका देश , तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान की वाशिंग्टन यात्रा के ब्योरे को चिंता के साथ देख रहा है। इस यात्रा में सीरिया, हथियारों और हथियारों के सौदे पर चर्चा हो रही है। रूस की चिंता इस लिए बढ़ गयी है क्योंकि तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान, दो नांव पर पैर रख कर चलना चाह रहे हैं, वह भी एक साथ। वह न रूस से दूर होना चाहते हैं और न ही अमरीका से बल्कि एक साथ दोनों से भरपूर फायदा उठाने का प्रयास कर रहे हैं।
अर्दोगान, तुर्की और अमरीका के बीच, रूसी एस- 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीदारी के बाद पैदा होने वाली कड़वाहट के बाद वाशिंग्टन गये हैं। इसी तनाव के परिणाम में डोनाल्ट ट्रम्प ने अर्दोगान के नाम अपने पत्र में उनका अपमान किया और उन्हें मूर्ख तक कह दिया था। इसके साथ ही ट्रम्प ने धमकी दी थी कि वह तुर्की की अर्थ-व्यवस्था को तबाह कर देंगे।
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इस प्रकार के अपमान के बाद बहुत से लोगों का यह अंदाज़ा था कि अर्दोगान कम से कम अपनी वाशिंग्टन यात्रा तो ज़रूर रद्द कर देंगे लेकिन अब यह महसूस हो रहा है कि अर्दागान दोनों नांव पर सवार होना चाहते हैं।
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रूस का संदेह इस लिए भी बढ़ गया क्योंकि तुर्की की सरकार ने, अर्दोगान की वाशिंग्टन यात्रा से एक महीने पहले ही एस-400 मिसाइल सिस्टम को रूस से लेने की प्रक्रिया रोक दी और इसके लिए कोई संतोषजनक कारण भी नहीं बताया जिसके बाद रूस के बहुत से विशेषज्ञों ने तुर्की के साथ इस सौदे के रद्द होने की आशंका भी प्रकट कर दी है। जब तुर्की ने अमरीका के एफ-35 युद्धक विमानों की जगह रूस के सोखो-35 विमान खरीदने के लिए जारी वार्ता भी  रोक दी तो तुर्की नीयत पर रूस का शक और बढ़ गया।वास्तव में तुर्की की सत्ताधारी पार्टी जस्टिस एंड डेवलेपमेंट में दो खैमे हैं। एक वह है जिसका मानना है कि अमरीका द्वारा कुर्दों के समर्थन और कुर्दों के खिलाफ युद्ध में नेटो द्वारा तुर्की के साथ सहयोग न किये जाने की वजह से तुर्की को रूसी पड़ोसी से संबंध बढ़ाना चाहिए और अब पूरब और इस्लामी जगत से निकट होना चाहिए।जबकि दूसरे खैमे का मानना है कि अमरीका और नेटो के साथ गत 70 वर्षों से जारी संबंधों को इतनी आसानी से खत्म नहीं करना चाहिए। यह धड़े की अगुवाई, तुर्की के वित्तमंत्री और अर्दोगान के दामाद, " बीरात एलबैरक" करते हैं। यह धड़े के लोग, वाशिंग्टन के साथ हर हाल में संबंध मज़बूत करने की वकालत करते हैं। उनका मानना है कि तुर्की को अमरीका से एन्टी मिसाइल सिस्टम " पेट्रियाट " और " एफ-35 " युद्धक विमान अमरीका से खरीदना चाहिए और रूस के एस-400 और सुखोई-35  का विचार छोड़ देना चाहिए।हमारे लिए यह अनुमान लगाना फिलहाल काफी मुश्किल है कि तुर्की में इन दोनों खैमों में से किस को सफलता मिलेगी क्योंकि हर एक के पास अपने अपने तर्क हैं लेकिन बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों दामादों, अर्थात राष्ट्रपति ट्रम्प के दामाद, जेयर्ड कुशनर और राष्ट्रपति अर्दोगान के दामाद, एलबैरक के बीच गहरी दोस्ती और व्यापार जैसा कि न्यूयार्क टाइम्ज़ ने बताया है, निर्णायक होगा। विशेषकर इस लिए भी कि ट्रम्प अपने मेहमान, अर्दोगान के साथ 100 अरब डालर का सौदा करने वाले हैं ताकि कांग्रेस के ओर से लगाये प्रतिबंधों की क्षतिपूर्ति हो जाए इसके साथ ही तुर्की की अर्थ व्यवस्था को तबाह करने की अपनी धमकी को भी वह वापस ले चुके हैं।रूस के प्रसिद्ध लेखक, एलेक्स नेत्शायोफ ने एक सप्ताह पहले एक लेख लिखा जिसका शीर्षक था " राष्ट्रपति अर्दोगान कब तक एक साथ दो कुर्सियों पर बैठेंगे?" (Q.A.) साभार, रायुल यौम, लंदन