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Thursday, August 29, 2019

पोले का पर्व तथा पुलिस की कार्यप्रणाली


जय प्रकाश मिश्रा
इन दिनों उत्सवों का दौर चल रहा है, 30 अगस्त को देश में किसानों के मित्र पोला उत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाने वाला है उसके बाद 2 सितंबर से देश में गणेशोत्सव आरंभ होगा। इन उत्सवों के दौरान सुरक्षा करने की जिम्मेदारी पुलिस विभाग की है। पुलिस कौन होता है यह बंदा, उसकी ही जिम्मेदारी क्यों है ? जब हम बडे ही आराम से उत्सव मना रहे होते है तो यह पुलिस कर्मचारी अपने गणवेश में खडा रहकर कहता है चिंता मत करों तुम बेखौफ होकर आनंद लो हम है ना......

लेकिन जिसके दम पर हम स्वयं को सुरक्षित महसूस करते है क्यों आम नागरिक पुलिस तथा उसके परिवार के बारे में विचार नहीं करता। मेरे एक पुलिस मित्र की माताजी तथा पत्नी ने कहा सुनो कल पोला है क्यों न हम सब मिलकर पोला उत्सव देखने जाए। परिजनों की यह बात सुनकर पुलिस मित्र को जवाब नहीं सूझ रहा था क्योंकि वह जिस थाने में नौकरी करता था उससे काफी दूर उसकी ड्यूटी पोला बंदोबस्त  के लिए लगाई गई थी। नौकरी तथा परिवार के बीच तालमेल न बैठा पाने वाले इस पुलिस कर्मचारी ने परिजनों का दिल रखने के लिए कहा कल देखते है किंतु वह स्वयं जानता था कि वह चाहकर भी उनकी इच्छा पूरी नहीं कर सकता है क्योंकि साहब छुट्टी नहीं देने वाले है। आखिरकार मन मारकर यह पुलिस कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर चला गया। गुरूवार को मैं अपने पुलिस मित्र के साथ चाय पीते हुए सामान्य बातों पर चर्चा कर रहा था तो उसने कहा कि यार बच्चों का समझाना काफी मुश्किल होता है बेटी जिद कर रही है कि पापा कल हम पोला देखने जायेगे, उसे उसे कैसे समझाऊ की मेरी तो ड्यूटी है इसलिए पत्नी को बोला कि तुम लेकर चले जाना। लेकिन पत्नी भी दूसरे जिले की होने के कारण वह भी अकेले जाने से हिचक महसूस कर रही है। काश मैंने पुलिस में नौकरी करने की बजाए महसूल विभाग में नौकरी की कोशिश की होती।  पुलिस मित्र की बातें सुनने के बाद इक पल के लिए ऐसा प्रतीत हुआ हम तो इनसे काफी बेहतर है जो अवकाश अथवा त्योहारों के दिनों में परिवार के साथ होते है लेकिन यह पुलिस वाले ना जाने कौन से मिट्‌टी से बने हुए है। यह चाहकर भी परिवार के साथ उत्सव नहीं मना पाते है। यदि इस देश का हर नागरिक स्वयं को पुलिस मानकर नियमों का पालन करें, विवाद करने की बजाए समझ कर दूसरों को समझाएं तो मुझे उम्मीद है फिर से किसी पुलिस वाले को यह कहने की नौबत नहीं आएगी कि काश मैने पुलिस की नौकरी ना की होती.........